यूक्रेन संकट
मास्को ने डोनबास के लोगों को, खास तौर पर रूसी बोलनेवाली आबादी को, कीव के नित्य हमलों से बचाने के लिए फरवरी 2022 को विशेष सैन्य अभियान शुरू किया था।

यूक्रेन में चुनाव के दिन हमले रोकने का निर्देश दे सकते हैं पुतिन: क्रेमलिन

© Sputnik / Yuri KochetkovMoscow Kremlin
Moscow Kremlin - Sputnik भारत, 1920, 12.10.2026
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रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन यूक्रेन में चुनाव के दिन हमले नहीं करने का निर्देश देने के लिए तैयार होंगे, बशर्ते कीव वास्तव में चुनाव कराना चाहता हो। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने रविवार को यह जानकारी दी।
पेसकोव ने कहा कि रूसी राष्ट्रपति इस मुद्दे पर पहले भी अपनी स्थिति स्पष्ट कर चुके हैं। उन्होंने जोर दिया कि संभावित रोक केवल मतदान वाले दिन के लिए होगी।
उन्होंने कहा, "अगर कीव वास्तव में चुनाव कराना चाहता है, तो रूसी राष्ट्रपति और सर्वोच्च कमांडर व्लादिमीर पुतिन यूक्रेन पर चुनाव के दिन हमले नहीं करने का निर्देश देने के लिए तैयार होंगे। यह केवल चुनाव वाले दिन के लिए होगा।"

60 दिन का युद्धविराम चुनाव के लिए नहीं: पेसकोव

क्रेमलिन के प्रवक्ता ने कहा कि यूक्रेन वास्तव में चुनाव नहीं कराना चाहता और उसकी ओर से मांगा गया 60 दिनों का युद्धविराम मतदान की तैयारी के लिए नहीं है।
पेसकोव ने कहा, "उन्हें 60 दिनों का युद्धविराम चुनाव के लिए नहीं, बल्कि अपनी ताकत जुटाने, घाव भरने और युद्ध जारी रखने के लिए चाहिए।"
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 11 अक्टूबर को कहा था कि यूक्रेनी नेता वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की को देश में चुनाव कराने चाहिए। ट्रंप के मुताबिक, यूक्रेन को ऐसे नए नेता की जरूरत है, जो रूस के साथ समझौता कर सके।
इसके बाद ज़ेलेंस्की ने कहा कि वह चुनाव के मुद्दे पर तभी आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं, जब रूस के साथ कम से कम 60 दिनों का पूर्ण युद्धविराम लागू हो।

रूस के चुनावों के बाद वार्ता के लिए तैयार था मॉस्को

पेसकोव ने यह भी कहा कि रूस की संसद के निचले सदन स्टेट ड्यूमा के लिए 18 से 20 सितंबर तक हुए चुनावों के तुरंत बाद मॉस्को शांति वार्ता जारी रखने के लिए तैयार था और उसने सार्वजनिक रूप से इसकी घोषणा भी की थी।
इसके बजाय यूक्रेनी सेना ने मॉस्को पर बड़े पैमाने पर हमले किए, मतदान बाधित करने की कोशिश की और रूस के नए क्षेत्रों में मतदान केंद्रों को निशाना बनाया।
पेसकोव के मुताबिक, इन हमलों में जिला चुनाव आयोगों के कई सदस्यों की मौत भी हुई।
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