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अफगानिस्तान को आर्थिक और मानवीय मदद जारी रखेगा रूस: लावरोव

© Sputnik / Yuri Kochetkov / मीडियाबैंक पर जाएंSergey Lavrov
Sergey Lavrov - Sputnik भारत, 1920, 16.10.2026
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रूस अफगानिस्तान के लोगों को आर्थिक और मानवीय सहायता देना जारी रखेगा। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने शुक्रवार को मध्य एशिया और अफगानिस्तान की सुरक्षा पर आयोजित एक सम्मेलन में यह बात कही।
लावरोव सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन (CSTO), स्वतंत्र राष्ट्रों के राष्ट्रमंडल (CIS) और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के संयुक्त सम्मेलन के पूर्ण सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने अफगानिस्तान के पड़ोसी देशों की ओर से की जा रही ऐसी पहलों का भी स्वागत किया।
लावरोव ने कहा, "रूस अफगान लोगों को हर संभव आर्थिक और मानवीय सहायता देना जारी रखेगा।"

ताजिक-अफगान सीमा की सुरक्षा में मदद कर रहा रूस

रूसी विदेश मंत्री ने कहा कि CSTO के तहत ताजिकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा को मजबूत करने के लिए एक विशेष अंतर-सरकारी कार्यक्रम लागू किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि रूस अपने ताजिक सहयोगियों को सीमा की सुरक्षा के लिए हथियार, सैन्य उपकरण और तकनीकी साधन समय पर उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम उठा रहा है।
लावरोव ने कहा, "हम ताजिक-अफगान सीमा को मजबूत करने के लक्षित कार्यक्रम के कार्यान्वयन पर विशेष ध्यान दे रहे हैं।"

एशिया में अपनी इच्छा थोपना चाहता है नाटो: लावरोव

लावरोव ने नाटो पर अपनी जिम्मेदारी के दायरे से बाहर जाकर एशिया में प्रभाव बढ़ाने का आरोप लगाया। उनके मुताबिक, नाटो अब पूरे यूरेशिया को अपनी जिम्मेदारी का क्षेत्र बताने की कोशिश कर रहा है।
उन्होंने कहा कि गठबंधन अपने सदस्य देशों की सुरक्षा का दावा करता है, लेकिन अब ताइवान जलडमरूमध्य और दक्षिण चीन सागर से आने वाले कथित खतरों का हवाला दे रहा है।
लावरोव ने कहा, "यह गंभीर वैचारिक बदलाव दिखाता है कि नाटो अपनी जिम्मेदारी के क्षेत्र से बहुत दूर अपनी इच्छा थोपना चाहता है। इसका रचनात्मक जवाब केवल क्षेत्र के देश ही दे सकते हैं।"

मध्य एशिया में स्थिति स्थिर, लेकिन जोखिम कायम

रूस मध्य एशिया की मौजूदा स्थिति को स्थिर और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के विकास के लिए अनुकूल मानता है। लावरोव ने इसके लिए क्षेत्र के देशों के नेतृत्व के योगदान की सराहना की।
हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि कुछ जोखिम अभी भी बने हुए हैं। उनके मुताबिक, इनमें से कई खतरे ऐसे बाहरी देशों की गतिविधियों से पैदा होते हैं, जो मध्य एशियाई देशों की परिस्थितियों और हितों की अनदेखी कर अपने भू-राजनीतिक लक्ष्य आगे बढ़ा रहे हैं।
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