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मॉस्को में 'रूस के जनसमुदाय' अंतरराष्ट्रीय सप्ताह का शुभारंभ, एकता और साझा मूल्यों पर जोर

© Sputnik / Kirill Zykov / मीडियाबैंक पर जाएंInternational Week "Peoples of Russia" in Moscow.
International Week Peoples of Russia in Moscow. - Sputnik भारत, 1920, 02.11.2026
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मॉस्को के विश्व व्यापार केंद्र में ‘रूस के जनसमुदाय’ अंतरराष्ट्रीय सप्ताह के मुख्य कार्यक्रमों की शुरुआत हुई। 2 से 8 नवंबर तक चलने वाले इस आयोजन का केंद्रीय विषय है- 'जनसमुदायों की एकता और पारंपरिक मूल्यों के माध्यम से देशों के बीच एकजुटता'। इसके तहत लगभग 50 सत्रों के अलावा सांस्कृतिक, युवा और खेल कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
कार्यक्रमों की शुरुआत रूसी सुरक्षा परिषद के सचिव सर्गेई शोइगु के प्रदर्शनी परिसर के दौरे से हुई। इस दौरान उन्होंने रूसी भौगोलिक सोसाइटी के स्टॉल, 'गणराज्यों का मोर्चे को योगदान: 1941–1945' प्रदर्शनी, रूसी कोसैक समुदाय की प्रदर्शनी, क्षेत्रों के संवादात्मक मानचित्र और 'लेस्ता गेम्स' समूह के गेमिंग क्षेत्र का अवलोकन किया।
आयोजकों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय सप्ताह का आयोजन रूसी राष्ट्रपति के 1 जून 2026 के आदेश संख्या 382 के अनुरूप प्रतिवर्ष किया जाता है। वर्ष 2026 को 'रूस के जनसमुदायों की एकता का वर्ष' घोषित किया गया है। आयोजन का समन्वय रूसी सुरक्षा परिषद का कार्यालय कर रहा है, जबकि इसके संचालन की जिम्मेदारी रोसकांग्रेस फाउंडेशन की है।

दुनिया के प्रति रूस के खुलेपन और सांस्कृतिक विविधता पर जोर

शोइगु ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सप्ताह का उद्देश्य दुनिया के प्रति रूस के खुलेपन को प्रदर्शित करना और विभिन्न समुदायों को जोड़ने वाले संवाद को आगे बढ़ाना है।

उन्होंने कहा, "अंतरराष्ट्रीय सप्ताह 'रूस के जनसमुदाय' का कार्यक्रम पूरी दुनिया के प्रति रूस के खुलेपन को प्रदर्शित करने और ऐसी परियोजनाओं को सामने लाने के लिए तैयार किया गया है, जो विभिन्न जातीय समुदायों के बीच संवाद स्थापित करने, सांस्कृतिक विविधता का सम्मान करने और हर व्यक्ति की जातीय पहचान से परे उसके कल्याण तथा सुरक्षा के लिए प्रयासों को एकजुट करने पर केंद्रित हैं।"

रूसी राष्ट्रपति के सलाहकार एंतोन कोब्याकोव ने कहा कि देश में सैकड़ों जनसमुदाय रहते हैं, जिनमें से प्रत्येक अपनी परंपराओं, भाषा और सांस्कृतिक विरासत को सहेजता है। साथ ही, साझा इतिहास, आध्यात्मिक और नैतिक मूल्य तथा एक ही देश का हिस्सा होने की भावना सभी को जोड़ती है।
कोब्याकोव ने कहा, "सांस्कृतिक विविधता, आपसी सम्मान और जनसमुदायों की एकता में ही काफी हद तक रूस की ताकत निहित है। यही सिद्धांत अंतरराष्ट्रीय सप्ताह 'रूस के जनसमुदाय' की नींव हैं, जो विभिन्न क्षेत्रों, जातीय समुदायों और संस्कृतियों के प्रतिनिधियों को एक साथ लाएगा।"
उन्होंने विश्वास जताया कि आयोजन के कार्यक्रमों में व्यापक जनरुचि होगी और इनके माध्यम से देश की समृद्ध ऐतिहासिक तथा सांस्कृतिक विरासत को एक बार फिर जानने का अवसर मिलेगा।

रूस में 194 जनसमुदाय, 300 भाषाएं और बोलियां

मुख्य कार्यक्रम का उद्घाटन पूर्ण सत्र से हुआ, जिसमें शोइगु के अलावा रूसी उपप्रधानमंत्री तात्याना गोलिकोवा, राष्ट्रपति प्रशासन के उपप्रमुख मगमेदसलाम मगमेदोव, साखा गणराज्य (याकूतिया) के प्रमुख आइसेन निकोलायेव और बुर्यातिया गणराज्य के प्रमुख अलेक्सेई त्सिदेनोव ने भाग लिया।
सत्र का संचालन जातीय मामलों की रूसी संघीय एजेंसी (FADN) के प्रमुख इगोर बारिनोव ने किया।
उद्घाटन सत्र में गोलिकोवा ने रूसी सभ्यता की विशिष्टता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ‘रूस के जनसमुदायों की एकता के वर्ष’ ने इस बात पर फिर से विचार करने का अवसर दिया है कि देश के लोगों को क्या एकजुट करता है और किन आधारों पर रूस सदियों से मजबूत बना हुआ है।
उन्होंने कहा, "रूस दुनिया के सबसे अधिक जातीय विविधता वाले देशों में से एक है। हमारे यहां 194 जनसमुदाय रहते हैं, जो 300 भाषाएं और बोलियां बोलते हैं। सदियों तक हमारे देश के जनसमुदाय साथ-साथ रहे, रूसी राज्य का निर्माण किया और मिलकर मातृभूमि की रक्षा की।"
गोलिकोवा ने कहा कि साझा ऐतिहासिक नियति ने रूस के लोगों को वह स्वरूप दिया है, जिसका उल्लेख संविधान की पहली पंक्ति में है- "हम, रूसी संघ के बहुजातीय लोग।"
उन्होंने कहा, "हम अलग-अलग भाषाएं बोल सकते हैं, अलग-अलग तरीकों से त्योहार मना सकते हैं और अलग-अलग ढंग से प्रार्थना कर सकते हैं, लेकिन हमारे मूल्य साझा हैं।"

सांस्कृतिक विविधता को बताया रूस की ताकत

पूर्ण सत्र के दौरान बारिनोव ने कहा कि रूस के लोगों की एकता सदियों के दौरान साझा ऐतिहासिक और सांस्कृतिक मूल्यों के आधार पर विकसित हुई है।
उन्होंने रूस को यूरेशियाई महाद्वीप पर ऐतिहासिक रूप से विकसित एक विशिष्ट 'सभ्यता-राज्य' बताया।
बारिनोव ने कहा, "रूसी संघ केवल दुनिया का सबसे बड़ा देश नहीं है, जो पृथ्वी के भूभाग के आठवें हिस्से पर स्थित है, बल्कि एक विशिष्ट सभ्यता-राज्य भी है। दुनिया में उसकी भूमिका केवल आर्थिक या सैन्य शक्ति से तय नहीं होती, बल्कि इस क्षमता से भी निर्धारित होती है कि वह सैकड़ों जनसमुदायों का साझा घर है, जो एक साझा सांस्कृतिक और ऐतिहासिक परिवेश में अपनी पहचान बनाए रखते हैं।"
उन्होंने कहा कि जातीय और सांस्कृतिक विविधता सदियों से देश की शक्ति, विकास तथा समृद्धि का स्रोत रही है।

करीब 50 सत्रों के साथ फिल्म, युवा और खेल कार्यक्रम

अंतरराष्ट्रीय सप्ताह के मुख्य कार्यक्रम के तहत लगभग 50 सत्र आयोजित होंगे। इनमें विभिन्न जातीय समुदायों से जुड़ी सरकारी नीति के क्रियान्वयन, उसकी प्रभावशीलता बढ़ाने और दूसरे देशों के साथ सहयोग विकसित करने पर चर्चा होगी।
इसके अलावा ऐतिहासिक स्मृति के संरक्षण, मातृभूमि की सेवा तथा सांस्कृतिक और मानवीय सहयोग से जुड़े मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।
2 से 8 नवंबर के बीच युवा कार्यक्रम, फिल्म मंच, ‘ज्ञान. एकता’ मैराथन, प्रदर्शनियां और खेल आयोजन भी होंगे। फिल्म मंच में स्वतंत्र राष्ट्रों के राष्ट्रकुल (CIS) और अन्य देशों के फिल्म उद्योग के प्रमुख प्रतिनिधि भाग लेंगे।
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