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मालदीव सहित पाँच देशों को मौसम संबंधी प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली विकसित करने में भारत की मदद

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) द्वारा दिसंबर में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में 101 देशों (52%) के पास अब बहु-खतरा प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियाँ हैं। WMO के निष्कर्ष मुताबिक 1970 और 2019 के बीच आपदाएँ पाँच गुना से अधिक बढ़ गईं।
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भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के डायरेक्टर जनरल मृत्युंजय महापात्र ने एक साक्षात्कार में बताया कि भारत अत्यंत खराब मौसम में जानमाल के नुकसान को कम करने के लिए नेपाल, मालदीव, श्रीलंका, बांग्लादेश और मॉरीशस में प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली विकसित करने में मदद कर रहा है।
इस प्रणाली के विकसित हो जाने के बाद इन देशों में किसी भी मौसमी प्राकृतिक आपदा से बचा जा सकेगा और जान माल की हानि को कम से कम किया जा सकेगा।
भारतीय मीडिया ने मृत्युंजय महापात्र के हवाले से बताया कि भारत सभी देशों के प्रयासों में एक बड़े भाई और एक सहकर्मी सलाहकार की भूमिका निभाएगा। यह कदम आगे भविष्य में आने वाली आपदाओं के जोखिम को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

महापात्र ने कहा, "हम इन पाँच देशों को मौसम स्टेशन स्थापित करने में मदद करेंगे, उन्हें हमारे संख्यात्मक मॉडल तक पहुँच की अनुमति देने के साथ साथ उन्हें निर्णय समर्थन प्रणाली और कंप्यूटिंग शक्ति बनाएंगे।"

महापात्र ने आगे बताया कि भारत प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली स्थापित करने की पहल के तहत पहले चरण में 30 में से पाँच देशों की मदद कर रहा है। इसके अलावा IMD पूर्वानुमान और चेतावनियाँ प्रदान करना जारी रखेगा।

उन्होंने कहा, "50% देशों के पास प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली नहीं है। गरीब देशों, अल्प विकसित देशों और छोटे द्वीप राष्ट्रों, उदाहरण के लिए, मालदीव और सेशेल्स, के पास खराब मौसम की घटनाओं के बारे में प्रारंभिक चेतावनी देने की क्षमता नहीं है। इसलिए आपदाओं के कारण लोग मर रहे हैं और बहुत सारी संपत्ति खो रहे हैं।"

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