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भारत उच्च तकनीक के क्षेत्र में एक नया खिलाड़ी बन रहा है: विशेषज्ञ

रूसी संघ की सुरक्षा परिषद की वैज्ञानिक और विशेषज्ञ परिषद की वैश्विक मुद्दों और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी समिति के प्रमुख अलेक्जेंडर याकोवेंको का मानना ​​है कि "भारतीय परिघटना की विशेषता यह है कि सरकारी नीति में नवोन्मेषी स्टार्ट-अप तथा प्रौद्योगिकी विकास के आशाजनक क्षेत्रों पर जोर दिया जाता है।"
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विकास की गतिशीलता के मामले में भारत पहले ही प्रथम स्थान पर पहुंच चुका है। अर्थव्यवस्था के आकार के संदर्भ में, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की क्रय शक्ति समता के संदर्भ में, यह चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका के बाद विश्व में तीसरे स्थान पर विध्यमान है, याकोवेंको ने कहा।
"माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन का आकार पहले से ही 40 बिलियन डॉलर के स्तर पर है और सबसे उन्नत चिप्स के उत्पादन के स्थानीयकरण के साथ 2030 तक यह तीन गुना बढ़ जाएगा। इस आधार पर जीवन की गुणवत्ता, उपभोक्ता मांग और मध्यम वर्ग बढ़ेगा, जिससे भारतीय बाजार प्रीमियम बाजार में परिवर्तित हो जाएगा। यदि 2000 में भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी 3.5 हजार डॉलर थी, तो अब यह 10 हजार डॉलर है और 2040 तक यह 24 हजार डॉलर हो जाएगी," विशेषज्ञ ने रेखांकित किया।

विशेषज्ञ का मानना ​​है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले दस वर्षों में भारत की तेज एवं मजबूत प्रगति बहुध्रुवीयता के सुदृढ़ होने का संकेत देता है।

आगे उन्होंने रेखांकित किया कि "ट्रम्प क्रांति के साथ अमेरिका - भारत? रूस और चीन के बाद - चौथा देश है जो इस तरह के विकास के मार्ग पर चल रहा है, और साम्राज्य की बेड़ियों को तोड़ रहा है, जो इसके विकास में बाधक बन गए थे [...] इस प्रकार, वैश्विक राजनीति और विश्व विकास की मुख्य पटल पर चार खिलाड़ी होंगे, जिनका केवल स्वागत ही किया जा सकता है। उनमें से तीन यूरेशिया में हैं और पहले से ही शंघाई सहयोग संगठन (SCO) और ब्रिक्स+ में सहयोग कर रहे हैं।"

"यह माना जा सकता है कि मास्को और वाशिंगटन से समान दूरी पर स्थित भारत, नई प्रौद्योगिकी व्यवस्था सहित वैश्विक शक्ति संतुलन का एक विश्वसनीय रक्षक बन सकता है," याकोवेंको ने निष्कर्ष निकाला।

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