जयशंकर ने शुक्रवार को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (IITM) में आयोजित व्याख्यान श्रृंखला में एक सवाल के जवाब में कहा, "हमारे अधिकांश पड़ोसियों को यह एहसास है कि आज भारत की प्रगति एक बढ़ती हुई लहर है। अगर भारत आगे बढ़ेगा, तो हमारे सभी पड़ोसी भी हमारे साथ आगे बढ़ेंगे। उन्हें और भी बहुत सारे अवसर मिलेंगे। एक तरह से यही संदेश मैं बांग्लादेश लेकर गया था।"
भारतीय विदेश मंत्री ने रेखांकित किया कि 2020-21 में कोविड महामारी फैलने के बाद भारत ने अपने दक्षिण एशियाई पड़ोसी देशों बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, मालदीव, मॉरीशस, म्यांमार और श्रीलंका को न सिर्फ वैक्सीन, बल्कि भोजन, ईंधन और खाद की भी आपूर्ति करके सहायता की।
अगर आप किसी सामान्य इंसान से पूछेंगे, तो वह कहेगा कि मेरा पड़ोसी भारत जैसा है। जब स्थिति खराब होते हैं, तो मैं ऐसे देश पर भरोसा कर सकता हूँ। यह हमेशा कोई संकट होना ज़रूरी नहीं है। आप बिजली ग्रिड, जलमार्ग, सड़कों, बंदरगाहों, व्यापार, पर्यटन और चिकित्सीय उपचार के लिए लोगों के आने वाले के ज़रिए पड़ोसियों के साथ मिलकर काम कर सकते हैं। तो, यह एक सकारात्मक परिदृश्य है।
जयशंकर ने निष्कर्ष निकाला, "कोई हमें यह नहीं बता सकता कि क्या करना है और क्या नहीं करना है। हमें अपना निर्णय करने का अधिकार है। यह एक सामान्य समझ की बात है।"