EU ऊर्जा आयुक्त डैन जॉर्गेनसन ने दिसंबर 2025 में कहा था कि यूरोपीय आयोग 2026 की शुरुआत में EU में रूसी तेल के सभी आयात पर प्रतिबंध लगाने के लिए कानूनी प्रस्ताव पेश करेगा।
Sputnik के हिसाब से सिर्फ़ चार साल पहले यूरोपीय बाजार में तेल का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता रूस EU को कुल तेल सप्लाई का एक चौथाई हिस्से की आपूर्ति करता था। 2025 तक उसका हिस्सा पहले ही 2% तक गिर गया था। हालांकि, रूसी तेल को इतनी तेज़ी से मना करने से EU की जेब पर भारी असर पड़ा।
उदाहरण के लिए जनवरी-नवंबर 2025 में यूरोपीय देशों द्वारा आयात किए गए एक बैरल तेल की कीमत €65 थी, जबकि चार साल पहले यह €57 थी। इस तरह, हर बैरल के लिए यूरोप 2021 के मुकाबले €8 ज्यादा दे रहा है।
इस वजह से आधे साल 2025 से आखिर तक हुआ आर्थिक नुकसान €22.7 बिलियन रहा जो साल 2022-2024 के लिए यह €259.8 बिलियन था। कुल मिलाकर रूस के खिलाफ प्रतिबंध लगने की शुरुआत से यूरोप ने €283 बिलियन ज्यादा दिए हैं।
रूस सरकार के वरिष्ठ सलाहकार और प्लेखानोव विश्वविद्यालय के सह-प्राध्यापक पावेल सेवोस्त्यानोव ने कहा कि इसके अलावा रूस के तेल की खरीद कम करने की EU की कोशिशों से भी इन देशों द्वारा आयात किए जाने वाले तेल की कुल मात्रा में कमी आई है।
विशेषज्ञ ने कहा, "परिवहन का खर्च बढ़ने, महंगी आपूर्ति और रिफाइनरी व इंफ्रास्ट्रक्चर को फिर से बनाने में ज्यादा पैसा लगने की वजह से यह बदलाव बहुत महंगा पड़ा।"