यह खोज दक्षिण यमाल में कंपनी के तेल उत्पादन केंद्र के विस्तार और दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है।
गाज़प्रोम ने इस क्षेत्र की खोज के लिए पिछले तीन वर्षों में व्यापक भूवैज्ञानिक अध्ययन किए, जिनमें 2D और 3D सिस्मिक सर्वे, भूमिगत संरचनाओं के भूवैज्ञानिक और हाइड्रोडायनामिक मॉडल तथा त्यूमेन स्थित वेल कंस्ट्रक्शन कंट्रोल सेंटर से 24×7 दूरस्थ ड्रिलिंग मॉनिटरिंग शामिल हैं।
इन तकनीकों ने कठिन आर्कटिक परिस्थितियों में भी सटीक परिणाम सुनिश्चित किए। जल्द ही आगे की खोज और ड्रिलिंग कार्य किए जाएंगे ताकि क्षेत्र की भूवैज्ञानिक संरचना और वास्तविक उत्पादन क्षमता का निर्धारण किया जा सके।
गाज़प्रोम प्रबंधन बोर्ड के प्रतिनिधि अलेक्ज़ेंडर द्यूकोव ने कहा, "हम डिजिटल मॉडलिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग सहित लगभग सभी क्षेत्रों में सक्रिय भूवैज्ञानिक अन्वेषण जारी रखे हुए हैं। यह खोज 2050 तक की रूस की ऊर्जा रणनीति के लक्ष्यों को पूरा करने में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी।”