नाकाबंदी प्रारंभ होन के बाद भी पांच टैंकर घरेलू गैस लेकर भारत आए हैं और अभी लगभग 20 टैंकर होर्मुज़ पार करने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
भारतीय नौसेना ने होर्मुज़ स्ट्रेट के मुहाने यानि ओमान की खाड़ी से ही इन जहाज़ों को अपनी सुरक्षा में ले लेती है। ओमान की खाड़ी से अरब सागर के रास्ते ये जहाज़ पश्चिमी भारत के बंदरगाहों तक पहुंचते हैं। लेकिन भारतीय नौसेना ओमान की खाड़ी के पहले से ही इन जहाज़ों की सहायता करना प्रारंभ कर देती है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार भारतीय नौसेना ईरान की सेना के संपर्क में है और उनसे चर्चा के बाद जहाज़ को सुरक्षित होर्मुज़ पार करने का रास्ता तय किया जाता है। रास्ता तय करने में ध्यान रखा जाता है कि स्ट्रेट पार करते समय उस जहाज़ पर तटों या दूसरे जहाज़ों से कोई आक्रमण न हो साथ ही उसे समुद्र में बिछी किसी बारूदी सुरंग से कोई खतरा पैदा न हो। उस रास्ते की जानकारी ईरान के अधिकारियों के साथ बांटी जाती है, साथ ही वहां से जहाज़ के निकलने का समय और उसकी पहचान भी सबको बता दी जाती है। इससे किसी गलतफहमी में किसी आक्रमण की आशंका पूरी तरह समाप्त हो जाती है, सूत्र ने बताया।
भारतीय नौसेना पिछले कई सालों से व्यापारिक जहाज़ों को अरब सागर में समुद्री डाकुओं से सुरक्षा देती आई है। इज़रायल-हमास संघर्ष के दौरान भी अरब सागर में व्यापारिक जहाज़ों की आवाजाही में संकट आया था तब भारतीय सेना की पश्चिमी कमान ने अरब सागर में अपनी उपस्थिति बढ़ा दी थी। इस समय भी भारतीय नौसेना अरब सागर में अपनी मज़बूत उपस्थिति बनाए हुए है ताकि भारत आने वाले ऊर्जा के प्रवाह को बनाए रखा जा सके।