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भारतीय नौसेना में शामिल हुआ शत्रु की सबमरीन का शिकारी
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कम गहरे समुद्र में शत्रु की पनडुब्बियों को नष्ट करने वाला एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW-SWC) वाला चौथा स्वदेशी युद्धपोत INS अंजादीप चेन्नई में... 27.02.2026, Sputnik भारत
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भारत इस श्रेणी के कुल 16 युद्धपोतों का निर्माण कर रहा है। नौसेना अध्यक्ष एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने इस अवसर पर सोवियत संघ मूल के पेत्या क्लास कॉर्वेट्स के याद करते हुए कहा कि अंजादीप उन युद्धपोतों का योग्य उत्तराधिकारी है।INS अंजादीप 900 से 1100 टन भारी और लगभग 256 फीट लंबा है। यह 25 नॉटिकल मील की गति से लगभग 3300 किमी की यात्रा कर सकता है। इसमें कुल 57 नौसैनिक और अधिकारी रह सकते हैं। इस श्रेणी के युद्धपोत की भूमिका समुद्र तटों के आसपास शत्रु की पनडुब्बियों की तलाश करना और उन्हें नष्ट करना है इसलिए उन्हें हल्का और समुद्र की सतह के नीचे प्रहार करने में सक्षम बनाया गया है।साथ ही इस श्रेणी के युद्धपोत शत्रु के विमानों को रोक सकते हैं, समुद्र में सुरंगे बिछा सकते हैं और समुद्र की निगरानी कर सकते हैं। ये युद्धपोत हिंद महासागर, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में समुद्री सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए तैयार किए जा रहे हैं।शत्रु की पनडुब्बियों की तलाश के लिए इस युद्धपोत में स्वदेशी अभय सोनार सहित संचार और तलाशी के अत्याधुनिक उपकरण लगाए गए हैं। शत्रु की पनडुब्बी को नष्ट करने के लिए एंटी सबमरीन रॉकेट और टॉरपीडो से इस युद्धपोत को सज्जित किया गया है।इसके अलावा, यह युद्धपोत समुद्र में एंटी सबमरीन बारूदी सुरंगे भी बिछा सकता है। इसमें 30 मिमी कैलिबर की बड़ी नौसेनिक तोप के अतिरिक्त दो रिमोट चलित मशीनगन भी लगाई गई हैं।
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भारत, आत्मनिर्भर भारत, भारतीय नौसेना, चेन्नई, बड़े एंटी-सबमरीन जहाज, युद्धपोत, रूस के युद्धपोत, सोवियत संघ, हिंद-प्रशांत क्षेत्र, अरब सागर, बंगाल की खाड़ी
भारतीय नौसेना में शामिल हुआ शत्रु की सबमरीन का शिकारी
कम गहरे समुद्र में शत्रु की पनडुब्बियों को नष्ट करने वाला एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW-SWC) वाला चौथा स्वदेशी युद्धपोत INS अंजादीप चेन्नई में भारतीय नौसेना में शामिल कर लिया गया। इस श्रेणी के तीन युद्धपोत INS अर्नाला, INS अंद्रोत और INS माहे पिछले वर्ष नौसेना में शामिल किए गए थे।
भारत इस श्रेणी के कुल 16 युद्धपोतों का निर्माण कर रहा है। नौसेना अध्यक्ष एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने इस अवसर पर सोवियत संघ मूल के पेत्या क्लास कॉर्वेट्स के याद करते हुए कहा कि अंजादीप उन युद्धपोतों का योग्य उत्तराधिकारी है।
एडमिरल त्रिपाठी ने भी पेत्या क्लास के पोत पर काम किया है। उन्होने कहा कि लाल सागर संकट ने बता दिया है कि केवल एक समुद्री यात्रा मार्ग के अवरुद्ध होने से हर महाद्वीप पर संकट आ सकता है। एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि वर्ष 2035 तक भारतीय नौसेना में 200 से अधिक युद्धपोत होंगे।
INS अंजादीप 900 से 1100 टन भारी और लगभग 256 फीट लंबा है। यह 25 नॉटिकल मील की गति से लगभग 3300 किमी की यात्रा कर सकता है। इसमें कुल 57 नौसैनिक और अधिकारी रह सकते हैं। इस श्रेणी के युद्धपोत की भूमिका समुद्र तटों के आसपास शत्रु की पनडुब्बियों की तलाश करना और उन्हें नष्ट करना है इसलिए उन्हें हल्का और समुद्र की सतह के नीचे प्रहार करने में सक्षम बनाया गया है।
साथ ही इस श्रेणी के युद्धपोत शत्रु के विमानों को रोक सकते हैं, समुद्र में सुरंगे बिछा सकते हैं और समुद्र की निगरानी कर सकते हैं। ये युद्धपोत हिंद महासागर, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में समुद्री सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए तैयार किए जा रहे हैं।
शत्रु की पनडुब्बियों की तलाश के लिए इस युद्धपोत में स्वदेशी अभय सोनार सहित संचार और तलाशी के अत्याधुनिक उपकरण लगाए गए हैं। शत्रु की पनडुब्बी को नष्ट करने के लिए एंटी सबमरीन रॉकेट और टॉरपीडो से इस युद्धपोत को सज्जित किया गया है।
इसके अलावा, यह युद्धपोत समुद्र में एंटी सबमरीन बारूदी सुरंगे भी बिछा सकता है। इसमें 30 मिमी कैलिबर की बड़ी नौसेनिक तोप के अतिरिक्त दो रिमोट चलित मशीनगन भी लगाई गई हैं।