सूत्रों ने Sputnik भारत को बताया कि अभी भारतीय सेना की हर कमान में ऐसी स्क्वाड्रन तैयार कर ली गई हैं और इनकी संख्या 5 से 6 है। भविष्य में भारतीय सेना की सभी 63 आर्मर्ड रेजीमेंट्स में शौर्य स्क्वाड्रन होंगी।
शौर्य स्क्वाड्रन ने शत्रु के टैंकों को पता लगाने वाले निगरानी ड्रोन, शत्रु टैंकों पर प्रहार करने वाले ड्रोन और झुंड में आक्रमण करने वाले स्वार्म ड्रोन होंगे। भारतीय सेना की आर्मर्ड रेजीमेंट शत्रु के ऊपर अपने टैंकों के अतिरिक्त आसमान से ड्रोन के साथ भी आक्रमण करने की तैयारी कर रही है। टैंकों के साथ चलने वाले ये ड्रोन शत्रु के टैंकों पर पता भी लगाएंगे और उन्हें नष्ट भी करेंगे।
भारतीय सेना की हर आर्मर्ड रेजीमेंट में 45 टैंक और लगभग 130-150 सैनिक होते हैं। हर आर्मर्ड रेजीमेंट को 14-14 टैंक की तीन स्क्वाड्रन में बांटा जाता है, इसके अतिरिक्त कमांडिंग अधिकारी, द्वितीय कमांडिंग अधिकारी और एडजुटेंट के तीन टैंकों को रेजीमेंट मुख्यालय स्क्वाड्रन कहा जाता है। सूत्रों के अनुसार शौर्य स्क्वाड्रन के लिए नई स्क्वाड्रन या सैनिक नहीं लाए जाएंगे बल्कि मौजूदा संगठन के ही सैनिकों को ड्रोन युद्धकला में पारंगत बनाया जाएगा।
पिछले कुछ वर्षों में ड्रोन ने युद्धक्षेत्र को पूरी तरह से बदल दिया है। खासतौर पर टैंक युद्धों में बहुत कम मूल्य के ड्रोन ने शत्रु के टैंकों को सबसे ज्यादा नष्ट किया है। भारतीय सेना इस नए युद्धकौशल का बचाव और आक्रमण दोनों ही तरह से प्रयोग करने के लिए तैयार हो रही है।