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भारतीय नौसेना को मिली फ्रिगेट और न्यूक्लियर सबमरीन की शक्ति

भारतीय नौसेना को एक ही दिन में दो बड़ी शक्तियां प्राप्त हुईं। तीसरी स्वदेशी परमाणु ऊर्जा से चलने वाली और परमाणु अस्त्र से सुसज्जित सबमरीन (SSBM) INS अरिदमन को भारतीय नौसेना में शामिल कर लिया गया। साथ ही नीलगिरि क्लास के चौथे स्टेल्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट INS तारागिरि को भी नौसेना में शामिल किया गया।
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भारतीय नौसेना ने समुद्र में अपनी अवरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए स्वदेशी SSBM का कार्यक्रम 90 के दशक में शुरू कर दिया था। इस कार्यक्रम के तहत कुल 4 सबमरीन बनाई जाने की योजना है। पहली SSBM INS अरिहंत अगस्त 2016 में भारतीय नौसेना में शामिल हुई, जबकि दूसरी INS अरिघात को 29 अगस्त 2024 को नौसेना में शामिल किया गया। इस क्लास की चौथी सबमरीन को 2025 में परीक्षण के लिए समुद्र में उतार दिया गया है, जो अगले साल तक परीक्षणों और विकास के दौर से गुज़रेगी।
अरिहंत और अरिघात दोनों ही 6000 टन वज़न की सबमरीन हैं, जिनका मुख्य अस्त्र K सीरीज़ की बैलेस्टिक मिसाइलें हैं। दोनों ही सबमरीन में 750 से 1500 किमी रेंज वाली 12 K-15 (सागरिका) या 4 K-4 मिसाइलें लगाई जा सकती हैं, जिनकी रेंज 4000 किमी है। तीसरी और चौथी सबमरीन पहली दोनों से बड़ी हैं, जिनका वज़न 7000 टन तक है। इनमें 8 K-4 या इतनी ही संख्या में 5000 से 6000 किमी तक मार करने वाली K-5 मिसाइलें लगाई जा सकेंगी।
अपनी अवरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय ने परमाणु ऊर्जा से चलने वाली, लेकिन परंपरागत अस्त्रों से लैस दो एसएसएन बनाने को मंज़ूरी दे दी है।
भारत सरकार के रक्षामंत्रालय के निर्णय के अनुसार नीलगिरि श्रेणी के कुल 7 युद्धपोतों का निर्माण किया जाना है, जिसमें से पहला नीलगिरि पिछले वर्ष 15 जनवरी को भारतीय नौसेना में शामिल किया गया है। लगभग 45000 करोड़ रुपए के कुल मूल्य के इन सभी युद्धपोतों को इस वर्ष नौसेना में शामिल कर लिया जाएगा।
ये सभी युद्धपोत आधुनिक समय के युद्धों के लिए पूरी तरह सुसज्जित हैं। इनका प्रमुख अस्त्र 8 ब्रह्मोस मिसाइलें हैं, जिनसे शत्रु के युद्धपोतों या ज़मीनी ठिकानों पर लंबी दूरी से हमला किया जा सकता है। शत्रु के हवाई हमले को रोकने के लिए 32 बराक मिसाइलें हैं, जिनकी रेंज 100 किमी तक है।
शत्रु की सबमरीन से मुकाबले के लिए वरुणास्त्र टारपीडो के अलावा एंटी-सबमरीन रॉकेट लगाए गए हैं। इसमें नौसैनिक तोपें भी लगाई गई हैं और एक हेलीकॉप्टर तैनात किया जा सकता है।
आधुनिक युद्धों की आवश्यकता के अनुसार इनमें अत्याधुनिक रडार और स्वदेशी सोनार सिस्टम लगाए गए हैं। इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर के लिए इनमें DRDO द्वारा विकसित शक्ति ईडब्ल्यू सूट लगाया गया है। युद्धपोत पर कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम लगाया गया है, जो अलग-अलग खतरों को भांपता है और उनके अनुसार आवश्यक अस्त्रों के चयन में सहायता करता है।
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