ये स्वदेशी एंटी ड्रोन सिस्टम हवा में मंडराते हुए शत्रु के ड्रोन को नष्ट करने या उसे निष्क्रिय करने की क्षमता रखेंगे। रक्षा सूत्रों से Sputnik को मिली जानकारी के अनुसार ये एंटी ड्रोन सिस्टम स्वदेशी रक्षा उद्योग द्वारा बनाए जा रहे हैं।
कैसे काम करेगा सिस्टम
ये एंटी ड्रोन सिस्टम ट्यूब द्वारा छोड़े जाएंगे और इन्हें हेलीकॉप्टर, किसी वाहन या किसी इमारत से छोड़ा जा सकेगा। यह सिस्टम छोड़े जाने के बाद 8000 फीट से ज्यादा ऊंचाई पर मंडराता रहेगा और तय महत्वपूर्ण ठिकाने पर आने वाले आक्रमणकारी ड्रोन की तलाश करता रहेगा।
यह ड्रोन को मार गिराने यानि हार्ड किल या उसे निष्क्रिय करने यानि सॉफ्ट किल दोनों ही तरह के विकल्पों का प्रयोग कर सकेगा। इस सिस्टम में किसी ड्रोन की जानकारी पाने, पहचानने और नष्ट करने की क्षमता होगी।
युद्धक्षेत्र में क्यों बढ़ा ड्रोन का महत्व
हाल के वर्षों में युद्धक्षेत्र में ड्रोन ने अपना महत्वपूर्ण स्थान बना लिया है। ड्रोन सिस्टम सस्ते होते हैं और इन्हें बिना किसी बड़े आधारभूत ढांचे के शत्रु के ऊपर छोड़ा जा सकता है।
ड्रोन आक्रमणों से बचाव के लिए मिसाइलों का प्रयोग करने के लिए बड़े आधारभूत ढांचे की आवश्यकता होती है। ड्रोन को सामान्य रडार से पहचानना और फिर उन्हें एयर डिफेंस मिसाइलों से नष्ट करना न केवल बहुत ज्यादा मंहगा होता है बल्कि यह पूरी तौर पर सुरक्षा भी नहीं दे पाता।
हाल के संघर्षों से मिला सबक
ईरान के अमेरिका और इज़राइल के साथ चल रहे युद्ध में ईरान ने अपने कम मूल्य के ड्रोन से न केवल अपने शत्रुओं को भारी क्षति पहुंचाई साथ ही युद्ध में उनके खर्च को भी बहुत ज्यादा बढ़ा दिया। पिछले वर्ष भारत और पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष में पाकिस्तान ने भारी संख्या में ड्रोन का प्रयोग किया था।
इसी लिए भारत लगातार ड्रोन युद्धकला में पारंगत हो रहा है और ड्रोन रोधी अस्त्रों को विकसित कर रहा है। भारत सरकार ऐसे ड्रोन रोधी अस्त्र चाहती है जो अभेद्य हों साथ ही कम मूल्य के हों।