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छोटे स्वदेशी उपग्रह देंगे भारतीय वायुसेना को नई शक्ति: सूत्र

भारत अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम में नई स्वदेशी तकनीक का प्रयोग कर उसे उन्नत बना रहा है। रक्षा उद्योग के सूत्रों ने Sputnik भारत को जानकारी दी है कि 150 किलोग्राम भार के हल्के और कम लागत के उपग्रह तैयार किये जा रहे हैं जिनका प्रयोग भारतीय वायुसेना द्वारा किया जाएगा।
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साथ ही भारतीय उद्योग अंतरिक्ष में घूम रहे अपने कृत्रिम उपग्रहों की मरम्मत करने, ईंधन भरने की तकनीक विकसित कर रहा है।

उपग्रहों में लगाए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के आकार को छोटा किए जाने के बाद 150 किलोग्राम तक के छोटे उपग्रहों से वह सभी कार्य करना संभव हो गया है जिन्हें बड़े उपग्रहों द्वारा किया जाता था। यह विशेष रूप से भारतीय वायुसेना के लिए लाभदायक है जो अब कम लागत में अपने विभिन्न अभियानों के लिए इन उपग्रहों का प्रभावी उपयोग कर सकेगी।

स्वदेशी उद्योगों द्वारा बनाए जा रहे छोटे कृत्रिम उपग्रहों में इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल (EO), इन्फ्रारेड (IR), सिंथेटिक अपर्चर रडार (SAR) और हाइपर स्पेक्ट्रल सेंसर्स जैसे सभी उपकरण लगाए जाएंगे। ये उपग्रह न केवल कम मूल्य के होंगे बल्कि हल्के होने के कारण इन्हें अंतरिक्ष में प्रक्षेपित करना भी आसान होगा।
कृत्रिम उपग्रहों को समय-समय पर मित्र देशों के स्पेस स्टेशन में ईंधन भरने या मरम्मत के लिए जाने की आवश्यकता होती है। नई तकनीक के प्रयोग से भारतीय उपग्रहों को यह सभी सुविधाएं कम मूल्य पर मिलेंगी साथ ही समय की भी बचत होगी। नई तकनीक भारतीय उपग्रह को मित्र स्पेस स्टेशन तक जाने और वहां उतरने तक के हर चरण को सुगम बनाएगी।
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