Explainers
पेचीदा कहानियाँ सुर्खियां बटोरती हैं लेकिन कभी कभी वे समझने के लिए मुश्किल और समय बर्बाद करनेवाले हो सकते हैं, और समय का मतलब पैसा है, तो आइए हमारे साथ अपना पैसा और समय बचाइए। दुनिया के बारे में हमारे साथ जानें।

रूस में चाय पीने की परंपरा

© Sputnik / Alexander KryazhevTraditional tea with milk popular in Russia's Republic of Tuva
Traditional tea with milk popular in Russia's Republic of Tuva - Sputnik भारत, 1920, 13.12.2022
सब्सक्राइब करें
रूस को इंग्लैंड और हॉलैंड की तुलना में पहले चाय पीने का मौका मिल गया था । इसे यूरोप में तो समुद्र के द्वारा, लेकिन रूस को जमीनी कारवां द्वारा पहुँचाया गया था।
चाय रूस में चीन से आई तकरीबन सन 1638 ई. में, चाय को उपहार के रूप में तत्कालीन रूस के बादशाह ज़ार मिखाइल फेडोरोविच के दरबार में पहली बार लाया गया था। यूरोप और भारत जैसे रूस में भी शुरूआती दौर में लगभग 17-वीं शताब्दी के अंत तक इसका उपयोग केवल एक दवा के रूप में ही किया जाता था । तमाम खतरों के बावजूद (रास्ते में, कारवाँ अक्सर लूट लिया जाता था और अन्य कंटेनरों में चाय डालने के बाद यह बिलकुल ही गायब हो जाती थी ) रूस को चाय की आपूर्ति तेजी से की गई। 18-वीं शताब्दी के अंत तक, चाय चीन से रूसी आयात का 30% का हिस्सा थी और 19-वीं शताब्दी में - 90% के हिस्से की थी।
18-वीं शताब्दी की शुरुआत में, चाय महंगी थी और केवल अभिजात वर्ग के लिए उपलब्ध थी। लेकिन जल्दी में किसानों और शहरी गरीबों को भी चाय पीने का अवसर मिला। चाय रूसी संस्कृति का एक अभिन्न अंग बन गई।
रूसी चाय पीने की परंपरा के तहत चाय पीने से पहले मेज हमेशा मेज़पोश से ढकी होती थी। चाय को अद्वितीय दस्तकारी चीनी मिट्टी के बर्तन में परोसा जाता है। एक समोवर यानी एक धातु के कंटेनर जिसका पारंपरिक रूप से पानी गर्म करने और उबालने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, उसके आस-पास इकट्ठे होकर पूरा परिवार हार्दिक बातचीत शुरू करता है।
एक अनिवार्य विशेषता के रूप में से एक और है जिसके अनुसार भरा-पूरा खिलाना-पिलाना चाहिये मतलब है रूस में "खाली" चाय पीना उचित नहीं है। सबसे गरीब घरों में भी मेज पर कम से कम रोटी जैसा ब्रेड परोसा जाता है।
आज, चाय को पूरे दिन के दौरान पिया जाता है और इसकी लोकप्रियता के कारण इसे रूस का राष्ट्रीय पेय माना जाता है। रूसी अपनी चाय को मजबूत और मीठी करके पसंद करते हैं, और कभी-कभी पुदीना जोड़कर नींबू के साथ परोसकर फलों के जैम को डालते हैं।
उल्लेखनीय बात यह है कि पूर्व-चाय युग में पारंपरिक रूसी पेय भारतीय की बहुत याद दिलाते हैं। जड़ी बूटियों, पत्तियों, पुष्पक्रम और जामुन के विभिन्न काढ़ों के अलावा, रूस में स्बीतेन नामक पेय 20-वीं शताब्दी की शुरुआत तक मुख्य राष्ट्रीय रूसी पेय के रूप में माना जाता था। स्बीतेन शहद और मसालों पर आधारित एक गर्म पेय है जिस में मसाला चाय में जैसे अक्सर - अदरक, ऋषि, सेंट जॉन पौधा, दालचीनी और जायफल डाला जाता था। और यद्यपि यह पेय रूसियों के बीच बहुत लंबे समय से प्रचालित रहा था, फिर भी इसके आधार पर परंपराओं की ऐसी विशेष व्यवस्था नहीं बनाई गई थी, जो चाय के आधार पर बनाई गई।
चाय पीने की सावधानी से संरक्षित परंपरा, सौहार्द के प्रतीक के रूप में मानकर दोस्तोवस्की, ओस्ट्रोव्स्की, करमज़िन जैसे प्रसिद्ध रूसी लेखकों ने अपने कार्यों में बार-बार चाय पीने के विषय को उठाया है। यह प्रक्रिया रूसी कलाकारों द्वारा कई चित्रों के कथानक का आधार भी बनकर रहती है।
न्यूज़ फ़ीड
0
loader
चैट्स
Заголовок открываемого материала