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भारत के आगामी चुनावों को चुनावी बॉन्ड का मुद्दा प्रभावित नहीं कर पाएगा

© AP Photo / Saurabh DasThe State Bank of India
The State Bank of India - Sputnik भारत, 1920, 06.04.2024
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राजनीतिक फंडिंग की चुनावी बांड योजना 2018 में शुरू की गई थी और भारतीय स्टेट बैंक की किसी भी शाखा से बॉन्ड खरीदने की अनुमति दी गई थी।
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने 15 फरवरी को चुनावी बॉन्ड योजना को रद्द कर दिया और इसे असंवैधानिक घोषित कर दिया।
यह योजना राजनीतिक फंडिंग में पारदर्शिता लाने के लिए राजनीतिक दलों को दिए जाने वाले नकदी दान के विकल्प के रूप में 2018 में संघीय सरकार द्वारा शुरू की गई थी ।
हालांकि सर्वोच्च अदालत के निर्णय के बाद विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि चुनावी बॉन्ड देश के इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला है।
इसके जवाब में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक टीवी चैनल को साक्षात्कार देते हुए कहा कि जो लोग चुनावी बॉन्ड की आलोचना कर रहे हैं, उन्हें पछतावा होगा।

मोदी ने कहा, "आज जो लोग इस पर नाच रहे हैं, उन्हें जल्द ही पछताना पड़ेगा।"

इस बीच Sputnik भारत ने राजनीतिक विशेषज्ञ विनोद कुमार शुक्ला से पूछा कि क्या विपक्ष इसे भाजपा का सामना करने के लिए अपने अभियान के मुद्दों में से एक बना रहा है और क्या यह व्यवहार्य है या नहीं।

चुनावी बॉन्ड में भ्रष्टाचार को लेकर लोग कांग्रेस पर विश्वास नहीं करेंगे

चुनावी बॉन्ड के पीछे भ्रष्टाचार के मुद्दे को उठाने वाली कांग्रेस के बारे में बात करते हुए शुक्ला ने Sputnik भारत से कहा कि कोई भी उस पार्टी पर विश्वास नहीं करेगा, जो गंभीर भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण चुनाव हार गई।

राजनीतिक विश्लेषक ने कहा, "2014 के बाद से, जब से भाजपा और मोदी सत्ता में आए, किसी भी मंत्री के भ्रष्टाचार में संलग्न होने की कोई खबर नहीं आई है। जनता के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं शुरू की गई हैं, लेकिन हर योजना पारदर्शी है और लोगों का मानना ​​है कि मोदी सरकार आम जनता के लाभ के लिए काम कर रही है।"

चुनावी बॉन्ड जारी होने का मतदान पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा

आगामी लोकसभा चुनावों पर चुनावी बॉन्ड मुद्दे के प्रभाव के बारे में अपने विचार साझा करते हुए शुक्ला ने कहा कि इसका चुनावों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि कांग्रेस और पूरे विपक्ष के लिए लोगों को यह समझाना वाकई एक कठिन मुद्दा है कि चुनावी बॉन्ड क्या हैं।

उन्होंने कहा, "क्या वे लोगों को यह समझा पाएंगे कि चुनावी बॉन्ड से सबसे अधिक लाभ भाजपा को हुआ है? मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूं क्योंकि भाजपा को 47 प्रतिशत चंदा मिला है, जबकि विपक्षी दलों और अन्य राजनीतिक दलों को 53 प्रतिशत चंदा मिला है। ऐसी स्थिति में, कांग्रेस लोगों को कैसे समझायेगी कि भाजपा भ्रष्टाचार में लिप्त है

उन्होंने आगे कहा कि यह विपक्ष द्वारा उन लोगों के क्रोध से स्वयं को बचाने के लिए चुनावी बॉन्ड में भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाने का एक निराशा से परिपूर्ण प्रयास है, जिन्होंने संघीय सरकार द्वारा भ्रष्टाचार के विरुद्ध कार्रवाई देखी है।

विशेषज्ञ ने कहा, "इतना ही नहीं एक टीवी साक्षात्कार में मोदी ने यह स्पष्ट कर दिया कि चुनावी बॉन्ड लाने के पीछे का उद्देश्य राजनीतिक फंडिंग में पारदर्शिता लाना था। बहुत ही सरल तरीके से उन्होंने देश के लोगों को बताया कि चुनावी बॉन्ड में कोई भ्रष्टाचार नहीं है, बल्कि इसे और अधिक पारदर्शिता लाने के लिए लाया गया था।"

उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को एक बात समझनी चाहिए कि लोग यह मानने को तैयार नहीं हैं कि उनका प्रधानमंत्री भ्रष्ट है, क्योंकि उन्होंने अपने दो कार्यकालों में सुशासन दिया है और अपने तीसरे कार्यकाल में सख्त कार्रवाई का वादा किया है।
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