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भारत ने आयात निर्भरता कम करने हेतु दुर्लभ अर्थ गलियारा और $793 मिलियन के चुंबक परियोजना की घोषणा की
भारत ने आयात निर्भरता कम करने हेतु दुर्लभ अर्थ गलियारा और $793 मिलियन के चुंबक परियोजना की घोषणा की
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विदेशी आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भरता कम करने के लिए बजट 2026 में भारत ने ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में दुर्लभ अर्थ धातु गलियारा बनाने की घोषणा की हैं।
2026-02-04T11:49+0530
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा बताई गई इस पहल का मकसद महत्वपूर्ण खनिजों के खनन, प्रसंस्करण, अनुसंधान और आधुनिक विनिर्माण में घरेलू क्षमताओं को मज़बूत करना है।इस कड़ी में इलेक्ट्रिक वाहनों, विंड टर्बाइन, इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्र के लिए आवश्यक उच्च चुंबकीय शक्ति - दुर्लभ अर्थ स्थायी चुंबक (REPMs) के लिए एक घरेलू इकोसिस्टम बनाकर ज़रूरी सामग्री के मामले में आत्मनिर्भरता की दिशा में निर्णायक कदम उठा रहा है।इस लक्ष्य को समर्थन देने के लिए सरकार ने नवंबर 2025 में 7,280 करोड़ रुपये की एक योजना को मंजूरी दी, जिसके तहत 6,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष की एकीकृत REPM विनिर्माण क्षमता विकसित की जाएगी। यह योजना दुर्लभ अर्थ ऑक्साइड से लेकर तैयार चुंबकों तक की पूरी मूल्य श्रृंखला को कवर करेगी।
https://hindi.sputniknews.in/20251226/china-begins-issuing-licenses-to-export-rare-earth-magnets-to-india-10279035.html
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विदेशी आपूर्ति श्रृंखला, बजट 2026, दुर्लभ अर्थ धातु गलियारा, इलेक्ट्रिक वाहनों, विंड टर्बाइन, रक्षा क्षेत्र, उच्च चुंबकीय शक्ति, दुर्लभ अर्थ स्थायी चुंबक, आत्मनिर्भरता की दिशा में निर्णायक कदम
विदेशी आपूर्ति श्रृंखला, बजट 2026, दुर्लभ अर्थ धातु गलियारा, इलेक्ट्रिक वाहनों, विंड टर्बाइन, रक्षा क्षेत्र, उच्च चुंबकीय शक्ति, दुर्लभ अर्थ स्थायी चुंबक, आत्मनिर्भरता की दिशा में निर्णायक कदम
भारत ने आयात निर्भरता कम करने हेतु दुर्लभ अर्थ गलियारा और $793 मिलियन के चुंबक परियोजना की घोषणा की
विदेशी आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भरता कम करने के लिए बजट 2026 में भारत ने ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में दुर्लभ अर्थ धातु गलियारा बनाने की घोषणा की हैं।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा बताई गई इस पहल का मकसद महत्वपूर्ण खनिजों के खनन, प्रसंस्करण, अनुसंधान और आधुनिक विनिर्माण में घरेलू क्षमताओं को मज़बूत करना है।
इस कड़ी में इलेक्ट्रिक वाहनों, विंड टर्बाइन, इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस और
रक्षा क्षेत्र के लिए आवश्यक उच्च चुंबकीय शक्ति - दुर्लभ अर्थ स्थायी चुंबक (REPMs) के लिए एक घरेलू इकोसिस्टम बनाकर ज़रूरी सामग्री के मामले में आत्मनिर्भरता की दिशा में निर्णायक कदम उठा रहा है।
इस लक्ष्य को समर्थन देने के लिए सरकार ने नवंबर 2025 में 7,280 करोड़ रुपये की एक योजना को मंजूरी दी, जिसके तहत 6,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष की एकीकृत REPM
विनिर्माण क्षमता विकसित की जाएगी। यह योजना दुर्लभ अर्थ ऑक्साइड से लेकर तैयार चुंबकों तक की पूरी मूल्य श्रृंखला को कवर करेगी।