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ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण तेल बाज़ार में अस्थिरता से निपटने के लिए भारत द्वारा विकल्पों पर विचार
ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण तेल बाज़ार में अस्थिरता से निपटने के लिए भारत द्वारा विकल्पों पर विचार
Sputnik भारत
केप्लर के अनुसार, रूस भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है, जिसका आयात हर दिन लगभग 1.16 मिलियन बैरल है।
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कूटनीतिक सूत्रों ने Sputnik भारत को बताया कि बढ़ते अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण रूसी तेल भारत के लिए एक फ़ायदेमंद विकल्प बन गया है। ईरान-अमेरिका संघर्ष के कारण तेल बाज़ारों में आए झटके ने भारत में चिंता पैदा कर दी है, लेकिन माना जा रहा है कि भारत सरकार इस स्थिति से निपटने के लिए अपनी "विविधीकरण रणनीति" पर भरोसा कर रही है।भारत के पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी की अध्यक्षता में कच्चे तेल, LPG और नेचुरल गैस की सप्लाई की स्थिति की समीक्षा के लिए सोमवार को दिल्ली में एक बैठक की गई।सरकारी सूत्रों ने Sputnik भारत को बताया कि भारत सरकार लगभग 41 देशों से कच्चा तेल आयात कर रही है, इसलिए मध्य पूर्व (मुख्य रूप से सऊदी अरब) से प्रभावित सप्लाई को दूसरे स्रोत से बदलना एक विकल्प है।हालांकि इस बात की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है कि मौजूदा हालात को देखते हुए भारत रूसी कच्चे तेल का इस्तेमाल बढ़ाएगा या नहीं, कई तेल विशेषज्ञों ने कहा है कि कीमतों पर बढ़ते दबाव को संभालने के लिए रूसी तेल दिल्ली के लिए सबसे फ़ायदेमंद विकल्प हो सकता है।कूटनीतिक सूत्रों ने यह भी बताया कि मध्य पूर्व में तनाव से रूसी कच्चे तेल की मांग और निर्यात की संभावनाओं में भारी उछाल आया है। शिप-ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, जनवरी में भारत ने मध्य पूर्व से कच्चे तेल की खरीद बढ़ाई थी, और देश की कुल आपूर्ति में इसका हिस्सा 55% था।उल्लेखनीय है कि दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई 'सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति' (CCS) की बैठक में अमेरिका-ईरान संघर्ष से उपजे क्षेत्रीय सुरक्षा संकट और आर्थिक व व्यावसायिक गतिविधियों पर इसके प्रभाव की विस्तृत समीक्षा की गई।
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ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण तेल बाज़ार में अस्थिरता से निपटने के लिए भारत द्वारा विकल्पों पर विचार
केप्लर के अनुसार, रूस भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है, जिसका आयात हर दिन लगभग 1.16 मिलियन बैरल है।
कूटनीतिक सूत्रों ने Sputnik भारत को बताया कि बढ़ते अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण रूसी तेल भारत के लिए एक फ़ायदेमंद विकल्प बन गया है।
ईरान-अमेरिका संघर्ष के कारण तेल बाज़ारों में आए झटके ने भारत में चिंता पैदा कर दी है, लेकिन माना जा रहा है कि भारत सरकार इस स्थिति से निपटने के लिए अपनी "विविधीकरण रणनीति" पर भरोसा कर रही है।
भारत के पेट्रोलियम और
नेचुरल गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी की अध्यक्षता में कच्चे तेल, LPG और नेचुरल गैस की सप्लाई की स्थिति की समीक्षा के लिए सोमवार को दिल्ली में एक बैठक की गई।
मंत्रालय द्वारा X पर पोस्ट किए गए एक बयान में कहा गया, “हम लगातार बदलते हालात पर नज़र रख रहे हैं, और देश में पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति सुनिश्चित करने और उन्हें कम कीमतों पर उपलब्ध कराने के लिए सभी ज़रूरी कदम उठाए जाएंगे।”
सरकारी सूत्रों ने Sputnik भारत को बताया कि भारत सरकार लगभग
41 देशों से कच्चा तेल आयात कर रही है, इसलिए मध्य पूर्व (मुख्य रूप से सऊदी अरब) से प्रभावित सप्लाई को दूसरे स्रोत से बदलना एक विकल्प है।
हालांकि इस बात की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है कि मौजूदा हालात को देखते हुए भारत
रूसी कच्चे तेल का इस्तेमाल बढ़ाएगा या नहीं, कई तेल विशेषज्ञों ने कहा है कि कीमतों पर बढ़ते दबाव को संभालने के लिए रूसी तेल दिल्ली के लिए सबसे फ़ायदेमंद विकल्प हो सकता है।
इसके अतिरिक्त, कूटनीतिक सूत्रों ने Sputnik भारत को बताया कि रोसनेफ्ट और लुकोइल पर अमेरिका के प्रतिबंध और भारत के खिलाफ़ उसकी धमकियों के बावजूद रूसी कच्चा तेल एशियाई बाजार में अपनी जगह बनाता रहेगा। उन्होंने बताया कि चीन रूसी तेल की अपनी खरीद बढ़ा रहा है, जैसा कि अलग-अलग एजेंसियों द्वारा बताए गए जनवरी के आंकड़ों से पता चलता है।
कूटनीतिक सूत्रों ने यह भी बताया कि मध्य पूर्व में तनाव से रूसी कच्चे तेल की मांग और निर्यात की संभावनाओं में भारी उछाल आया है।
शिप-ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, जनवरी में भारत ने मध्य पूर्व से कच्चे तेल की खरीद बढ़ाई थी, और देश की कुल आपूर्ति में इसका हिस्सा 55% था।
उल्लेखनीय है कि दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई 'सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति' (CCS) की बैठक में अमेरिका-ईरान संघर्ष से उपजे क्षेत्रीय सुरक्षा संकट और आर्थिक व व्यावसायिक गतिविधियों पर इसके प्रभाव की विस्तृत समीक्षा की गई।