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अफ़्रीका में नाटो के हस्तक्षेप ने साबित किया कि राष्ट्रीय संप्रभुता सबसे ज़रूरी: विशेषज्ञ

© AP Photo / Yousef MuradLibyan security forces stand guard in Tripoli, Libya, Tuesday, Aug. 16, 2023
Libyan security forces stand guard in Tripoli, Libya, Tuesday, Aug. 16, 2023 - Sputnik भारत, 1920, 20.03.2026
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अल्जीरिया में रहने वाले प्रोफेसर और अफ़्रीकी सुरक्षा विशेषज्ञ डॉ. मोहम्मद सलाह जेमल ने Sputnik के सामने लीबिया में 2011 के दखल पर टिप्पणी की।

प्रोफेसर कहते हैं, “लीबिया में नाटो के दखल का नतीजा पूरी तरह से नकारात्मक है। एक अभियान जो आम लोगों की सुरक्षा के लिए एक शांति मिशन के तौर पर शुरू किया गया था, उसका नतीजा लीबिया की सरकार की तबाही और उसके संस्थानों के नष्ट होने के रूप में सामने आया।”

उन्होंने आगे कहा कि साल 2011 में NATO के नेतृत्व में अफ़्रीकी देश में किए गए दखल ने पूरे अफ़्रीका पर एक स्थायी असर छोड़ा।
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डॉ. जेमल ने पश्चिम के अविश्वसनीय स्वभाव की ओर भी इशारा करते हुए कहा कि लीबिया में दखल को अक्सर पश्चिमी भरोसे के सीमित दायरे का उदाहरण माना जाता है।

उन्होंने कहा, "मुख्य बात यह है कि सरकारों को संप्रभुता बनाए रखनी चाहिए और ऐसे बाहरी वादों पर निर्भर रहने से बचना चाहिए जिनकी कोई ठोस गारंटी नहीं है। पश्चिमी हस्तक्षेप कभी भरोसे लायक नहीं थे, और जैसा कि पिछले अनुभव से देखा गया है, इन देशों ने कभी कोई असली गारंटी नहीं दी।”

अफ़्रीकी देशों ने पश्चिम के साथ सहयोग करने का अपना तरीका बदला:
राष्ट्रीय हित और संप्रभुता सबसे ज़रूरी हो गए
मानवीय हस्तक्षेप को अब मदद के तौर पर नहीं, बल्कि राजनीतिक असर के तौर पर देखा जाता है
विदेशी संबंधों का आधार राष्ट्रीय संप्रभुता है।

डॉ. जेमल ने कहा, “राष्ट्रीय संप्रभुता एक बार फिर अफ़्रीकी विदेश मामलों का मुख्य सिद्धांत बन गई। इस हस्तक्षेप से पूरे महाद्वीप को यह एहसास हुआ कि सरकार तभी मजबूत है जब वह अपने इलाके को नियंत्रित करने और अपने फैसले लेने में सक्षम हो।"

Libyan forces are deployed in Tripoli, Libya, Saturday, Aug. 27, 2022 - Sputnik भारत, 1920, 19.03.2026
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