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ट्रांसअटलांटिक गुलामी के असर आज भी महसूस किए जा सकते हैं: शोधकर्ता
ट्रांसअटलांटिक गुलामी के असर आज भी महसूस किए जा सकते हैं: शोधकर्ता
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मोहम्मद सलाह जेमल, यूनिवर्सिटी के लेक्चरर और इंटरनेशनल सिक्योरिटी रिसर्चर ने Sputnik अफ्रीका को बताया कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा गुलामी को मानवता के खिलाफ अपराध... 27.03.2026, Sputnik भारत
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उन्होंने यह भी बताया कि फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम जैसे देशों का इस पर खुलकर हिस्सा न लेना दिखाता है कि ये देश "इतिहास पर संवेदनशील बहस" से डरते हैं।
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ट्रांसअटलांटिक गुलामी के असर आज भी महसूस किए जा सकते हैं: शोधकर्ता
मोहम्मद सलाह जेमल, यूनिवर्सिटी के लेक्चरर और इंटरनेशनल सिक्योरिटी रिसर्चर ने Sputnik अफ्रीका को बताया कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा गुलामी को मानवता के खिलाफ अपराध मानने में इतना समय इसलिए लगा क्योंकि "इतिहास में लंबे समय तक वही ताकतें हावी थीं जो खुद इस व्यापार में शामिल थीं।"
जेमल ने कहा कि "ट्रांसअटलांटिक गुलामी ने अफ्रीकी समाजों को कमजोर किया और पश्चिमी देशों की अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत किया, आज की आर्थिक असमानताएं भी कुछ हद तक इसी इतिहास का नतीजा हैं।"
उन्होंने यह भी बताया कि
फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम जैसे देशों का इस पर खुलकर हिस्सा न लेना दिखाता है कि ये देश "इतिहास पर संवेदनशील बहस" से डरते हैं।