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समुद्र में और बढ़ी भारत की शक्ति, तीन स्वदेशी युद्धपोत मिले
समुद्र में और बढ़ी भारत की शक्ति, तीन स्वदेशी युद्धपोत मिले
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भारतीय नौसेना को एक ही दिन में तीन महत्वपूर्ण युद्धपोत स्वदेशी डॉकयार्ड ने सौंप दिए हैं और जल्द ही ये तीनों नौसेना में शामिल कर लिए जाएंगे। इनमें से सबसे बड़ा... 31.03.2026, Sputnik भारत
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तीनों ही युद्धपोत कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) में बनाए गए हैं। भारतीय नौसेना अरब सागर और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नई चुनौतियों का सामना करने के लिए खुद को लगातार शक्तिशाली बना रही है।तीनों में सबसे बड़ा और शक्तिशाली युद्धपोत नीलगिरि क्लास का स्टेल्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट दूनागिरि है। लगभग 6500 टन भारी और 149 मीटर लंबा यह युद्धपोत इस तरह बनाया गया है कि इसे शत्रु के रडार से छिपाया जा सके।इसमें 226 नौसैनिक 2500 नॉटिकल मील से 5500 नॉटिकल मील की यात्रा कर सकते हैं। इसमें शत्रु के पोतों या ज़मीन पर आक्रमण करने के लिए 8 ब्रह्मोस मिसाइलें, सबमरीन का मुक़ाबला करने के लिए टॉरपीडो और रॉकेट्स और हवाई हमले से सुरक्षा के लिए बराक मिसाइलें लगी हैं।इसमें शक्तिशाली स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट और सबमरीन आक्रमण को विफल करने वाले डेकॉय लगे हैं। दूनागिरि इस श्रेणी का पांचवां युद्धपोत है जिसे पिछले 16 महीने में नौसेना को सौंपा गया है।भारतीय नौसेना के वारशिप डिज़ाइन ब्यूरो द्वारा डिज़ाइन किया गया चौथा और अंतिम संधायक श्रेणी का बड़ा सर्वेक्षण पोत संसोधक भी नौसेना को मिल गया। इस श्रेणी के पहले पोत INS संधायक को फरवरी 2024, INS निर्देशक को दिसंबर 2024 और तीसरे पोत INS इक्षक को नवंबर 2025 में नौसेना में शामिल किया गया है।ये सभी पोत तटवर्ती और गहरे समुद्र में हर तरह के सर्वेक्षण में सक्षम हैं। इनसे बंदरगाहों और समुद्री मार्गों की सटीक जानकारी एकत्र करने के अतिरिक्त रक्षा और नागरिक कार्यों के लिए समुद्र की सभी आवश्यक जानकारियां प्राप्त की जा सकती हैं। 3400 टन वज़नी यह पोत अत्याधुनिक डाइड्रोग्राफी उपकरणों, ड्रोन और रिमोट से नियंत्रित वाहनों से लैस हैं।कम गहरे समुद्र और तटवर्ती क्षेत्रों में शत्रु की सबमरीन को ढूंढ़ने और नष्ट करने वाला अरनाला श्रेणी का चौथा ASW SWC (Anti-Submarine Warfare Shallow Water Craft) 900 टन भारी कार्वेट अग्रेय भी नौसेना को दे दिया गया। यह अपने और पड़ोसी मित्र देशों के तटों के आसपास चौकसी रख सकता है, गश्त लगा सकता है, हल्की-फुल्की समुद्री झड़पों में भाग ले सकता है और शत्रु की सबमरीन को तलाश करके उसे नष्ट कर सकता है।इसमें अत्याधुनिक सेंसर और सोनार लगाए गए हैं, इसमें 57 नौसैनिक रह सकते हैं। शत्रु की सबमरीन को नष्ट करने के लिए एंटी सबमरीन रॉकेट और टॉरपीडो के अतिरिक्त यह समुद्र में बारूदी सुरंगे भी लगा सकता है।
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भारत, आत्मनिर्भर भारत, भारतीय नौसेना, युद्धपोत, अरब सागर, हिंद-प्रशांत क्षेत्र, ब्रह्मोस , बड़े एंटी-सबमरीन जहाज, टॉरपीडो
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समुद्र में और बढ़ी भारत की शक्ति, तीन स्वदेशी युद्धपोत मिले
11:56 31.03.2026 (अपडेटेड: 11:57 31.03.2026) भारतीय नौसेना को एक ही दिन में तीन महत्वपूर्ण युद्धपोत स्वदेशी डॉकयार्ड ने सौंप दिए हैं और जल्द ही ये तीनों नौसेना में शामिल कर लिए जाएंगे। इनमें से सबसे बड़ा युद्धपोत फ्रिगेट दूनागिरि है, दूसरा बड़ा सर्वेक्षण पोत संसोधक और तीसरा सबमरीनों का शिकारी अग्रेय है।
तीनों ही युद्धपोत कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) में बनाए गए हैं। भारतीय नौसेना अरब सागर और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नई चुनौतियों का सामना करने के लिए खुद को लगातार शक्तिशाली बना रही है।
तीनों में सबसे बड़ा और शक्तिशाली युद्धपोत नीलगिरि क्लास का स्टेल्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट दूनागिरि है। लगभग 6500 टन भारी और 149 मीटर लंबा यह युद्धपोत इस तरह बनाया गया है कि इसे शत्रु के रडार से छिपाया जा सके।
इसमें 226 नौसैनिक 2500 नॉटिकल मील से 5500 नॉटिकल मील की यात्रा कर सकते हैं। इसमें शत्रु के पोतों या ज़मीन पर आक्रमण करने के लिए 8 ब्रह्मोस मिसाइलें, सबमरीन का मुक़ाबला करने के लिए टॉरपीडो और रॉकेट्स और हवाई हमले से सुरक्षा के लिए बराक मिसाइलें लगी हैं।
इसमें शक्तिशाली स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट और सबमरीन आक्रमण को विफल करने वाले डेकॉय लगे हैं। दूनागिरि इस श्रेणी का पांचवां युद्धपोत है जिसे पिछले 16 महीने में नौसेना को सौंपा गया है।
भारतीय नौसेना के वारशिप डिज़ाइन ब्यूरो द्वारा डिज़ाइन किया गया चौथा और अंतिम संधायक श्रेणी का बड़ा सर्वेक्षण पोत संसोधक भी नौसेना को मिल गया। इस श्रेणी के पहले पोत INS संधायक को फरवरी 2024, INS निर्देशक को दिसंबर 2024 और तीसरे पोत INS इक्षक को नवंबर 2025 में नौसेना में शामिल किया गया है।
ये सभी पोत तटवर्ती और गहरे समुद्र में हर तरह के सर्वेक्षण में सक्षम हैं। इनसे बंदरगाहों और समुद्री मार्गों की सटीक जानकारी एकत्र करने के अतिरिक्त रक्षा और नागरिक कार्यों के लिए समुद्र की सभी आवश्यक जानकारियां प्राप्त की जा सकती हैं। 3400 टन वज़नी यह पोत अत्याधुनिक डाइड्रोग्राफी उपकरणों, ड्रोन और रिमोट से नियंत्रित वाहनों से लैस हैं।
कम गहरे समुद्र और तटवर्ती क्षेत्रों में शत्रु की सबमरीन को ढूंढ़ने और नष्ट करने वाला अरनाला श्रेणी का चौथा ASW SWC (Anti-Submarine Warfare Shallow Water Craft) 900 टन भारी कार्वेट अग्रेय भी नौसेना को दे दिया गया। यह अपने और पड़ोसी मित्र देशों के तटों के आसपास चौकसी रख सकता है, गश्त लगा सकता है, हल्की-फुल्की समुद्री झड़पों में भाग ले सकता है और शत्रु की सबमरीन को तलाश करके उसे नष्ट कर सकता है।
इसमें अत्याधुनिक सेंसर और सोनार लगाए गए हैं, इसमें 57 नौसैनिक रह सकते हैं। शत्रु की सबमरीन को नष्ट करने के लिए एंटी सबमरीन रॉकेट और टॉरपीडो के अतिरिक्त यह समुद्र में बारूदी सुरंगे भी लगा सकता है।