https://hindi.sputniknews.in/20260405/iiriaan-snghrish-kaa-priyaavrin-pri-asri-prkti-ke-khilaaf-puurin-yuddh-jaisaa-hai-visheshgya-10701798.html
ईरान संघर्ष का पर्यावरण पर असर प्रकृति के ख़िलाफ़ पूर्ण युद्ध जैसा है: विशेषज्ञ
ईरान संघर्ष का पर्यावरण पर असर प्रकृति के ख़िलाफ़ पूर्ण युद्ध जैसा है: विशेषज्ञ
Sputnik भारत
मिस्र के विशेषज्ञ मुस्तफ़ा शेरबिनी के अनुसार, ईरान में संघर्ष का पर्यावरण पर असर प्रकृति के खिलाफ़ पूर्ण युद्ध जैसा है।
2026-04-05T08:40+0530
2026-04-05T08:40+0530
2026-04-05T08:40+0530
पर्यावरण
ईरान
अमेरिका-इजराइल-ईरान युद्ध
sputnik मान्यता
मध्य पूर्व
https://cdn1.img.sputniknews.in/img/07ea/03/19/10670076_0:0:3072:1728_1920x0_80_0_0_ee216ddd1e94d8dcb4374efba2caf0c8.jpg
मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध के बीच ऑयल ठिकानों में आग लगने की वजह से, वायुमंडल में छोड़े गए उत्सर्जन अम्लीय वर्षा के रूप में वापस खाड़ी क्षेत्र में लौट आते हैं। इससे पानी का रासायनिक संतुलन अपरिवर्तनीय रूप से बदल जाता है और वनस्पति तथा जीव-जंतुओं को नष्ट किया जाता है, मिस्र के विशेषज्ञ और जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन के पर्यवेक्षक मुस्तफ़ा शेरबिनी ने Sputnik से कहा।शेरबिनी के अनुसार, खाड़ी की भौगोलिक विशेषताएं इस स्थिति को और भी गंभीर बना देती हैं। यह आंशिक रूप से भूमि से घिरा हुआ जलक्षेत्र है, जहाँ पानी का आदान-प्रदान बेहद धीमी गति से होता है।उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि रसायनों से लदे जहाज़ों से जुड़ी किसी भी दुर्घटना के परिणामस्वरूप खाड़ी में दीर्घकालिक आपदा उत्पन्न हो सकती है। इसका अर्थ यह है कि लोग वास्तव में उसी संसाधन को प्रदूषित कर रहे हैं, जिस पर पूरे क्षेत्र की आबादी का जीवन और स्वास्थ्य निर्भर करता है।
https://hindi.sputniknews.in/20260401/trump-says-us-forces-would-end-operations-in-iran-very-soon-10694576.html
ईरान
मध्य पूर्व
Sputnik भारत
feedback.hindi@sputniknews.com
+74956456601
MIA „Rossiya Segodnya“
2026
खबरें
hi_IN
Sputnik भारत
feedback.hindi@sputniknews.com
+74956456601
MIA „Rossiya Segodnya“
https://cdn1.img.sputniknews.in/img/07ea/03/19/10670076_114:0:2845:2048_1920x0_80_0_0_dfbf7a42e9a5c26adc0cee6552229693.jpgSputnik भारत
feedback.hindi@sputniknews.com
+74956456601
MIA „Rossiya Segodnya“
ईरान, पर्यावरण, ईरान-इजराइल-अमेरिका युद्ध
ईरान, पर्यावरण, ईरान-इजराइल-अमेरिका युद्ध
ईरान संघर्ष का पर्यावरण पर असर प्रकृति के ख़िलाफ़ पूर्ण युद्ध जैसा है: विशेषज्ञ
मिस्र के विशेषज्ञ मुस्तफ़ा शेरबिनी के अनुसार, ईरान में संघर्ष का पर्यावरण पर असर प्रकृति के खिलाफ़ पूर्ण युद्ध जैसा है।
मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध के बीच ऑयल ठिकानों में आग लगने की वजह से, वायुमंडल में छोड़े गए उत्सर्जन अम्लीय वर्षा के रूप में वापस खाड़ी क्षेत्र में लौट आते हैं। इससे पानी का रासायनिक संतुलन अपरिवर्तनीय रूप से बदल जाता है और वनस्पति तथा जीव-जंतुओं को नष्ट किया जाता है, मिस्र के विशेषज्ञ और जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन के पर्यवेक्षक मुस्तफ़ा शेरबिनी ने Sputnik से कहा।
शेरबिनी के अनुसार, खाड़ी की भौगोलिक विशेषताएं इस स्थिति को और भी गंभीर बना देती हैं। यह आंशिक रूप से भूमि से घिरा हुआ जलक्षेत्र है, जहाँ पानी का आदान-प्रदान बेहद धीमी गति से होता है।
"ऐसी बंद जल प्रणाली में विषैले पदार्थ बाहर नहीं निकलते, बल्कि दशकों तक जमा होते रहते हैं," विशेषज्ञ ने कहा।
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि रसायनों से लदे जहाज़ों से जुड़ी किसी भी दुर्घटना के परिणामस्वरूप
खाड़ी में दीर्घकालिक आपदा उत्पन्न हो सकती है। इसका अर्थ यह है कि लोग वास्तव में उसी संसाधन को प्रदूषित कर रहे हैं, जिस पर पूरे क्षेत्र की आबादी का जीवन और स्वास्थ्य निर्भर करता है।
"करीब 10 करोड़ लोगों के लिए यह खाड़ी जीवन का एकमात्र स्रोत है, और उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है। अब यह सिर्फ़ पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के अस्तित्व का प्रश्न बन चुका है," उन्होंने रेखांकिट किया।