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भारतीय वायुसेना को मिलेंगे हेलीकॉप्टर से निकलने वाले स्वदेशी ड्रोन: सूत्र
भारतीय वायुसेना को मिलेंगे हेलीकॉप्टर से निकलने वाले स्वदेशी ड्रोन: सूत्र
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भारतीय वायुसेना ने दो नए स्वदेशी ड्रोन अपने शस्त्रागार में लाने की तैयारी कर ली है। 10.04.2026, Sputnik भारत
2026-04-10T18:54+0530
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सूत्रों से Sputnik भारत को मिली जानकारी के अनुसार इनमें से एक लड़ाकू ड्रोन होगा जिसे रूसी मूल के Mi-17 हेलीकॉप्टर से लांच किया जा सकेगा। दूसरी तरह के ड्रोन झुंड में काम करने वाले यानि स्वार्म होंगे जो शत्रु के क्षेत्र में जाकर उसके एयर डिफेंस को छकाकर जानकारी एकत्र करने, चौकसी करने जैसे काम करेंगे।हेलीकॉप्टर से लांच किए जाने वाले स्वार्म ड्रोन का काम शत्रु के क्षेत्र में जाकर जासूसी करना, निगरानी और चौकसी रखना, शत्रु के नुकसान का आकलन करा होगा। साथ ही ये सारे काम करते समय अपनी अत्यधिक संख्या के कारण शत्रु के एयर डिफेंस को भी विफल करने की क्षमता रखते हैं। ये ड्रोन भी हेलीकॉप्टर से छोड़े जाने के बाद भी पायलट के नियंत्रण में रहेंगे जिन्हें हवा में छोड़े जाने के बाद उड़ान के दौरान भी नए लक्ष्यों पर भेजा जा सकेगा। पिछले एक दशक में सैन्य क्षेत्र में ड्रोन का प्रयोग बहुत तेज़ी से बढ़ा है और हाल में हुए संघर्षों ने सिद्ध कर दिया है कि ड्रोन युद्धकला में पारंगत होना आवश्यक है। पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध में ईरान के कम मूल्य के ड्रोन ने अमेरिका और इज़रायल के सैनिक ठिकानों को भारी क्षति पहुंचाई है। विशेषकर झुंड में काम करने वाले ड्रोन ने सबसे विश्वसनीय मानी जाने वाली एयर डिफेंस प्रणालियों को भी असफल कर दिया है। भारतीय सेनाएं भी ड्रोन युद्धकौशल में तेज़ी से प्रगति कर रही हैं।
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भारतीय वायुसेना को मिलेंगे हेलीकॉप्टर से निकलने वाले स्वदेशी ड्रोन: सूत्र
भारतीय वायुसेना ने दो नए स्वदेशी ड्रोन अपने शस्त्रागार में लाने की तैयारी कर ली है।
सूत्रों से Sputnik भारत को मिली जानकारी के अनुसार इनमें से एक लड़ाकू ड्रोन होगा जिसे रूसी मूल के Mi-17 हेलीकॉप्टर से लांच किया जा सकेगा। दूसरी तरह के ड्रोन झुंड में काम करने वाले यानि स्वार्म होंगे जो शत्रु के क्षेत्र में जाकर उसके एयर डिफेंस को छकाकर जानकारी एकत्र करने, चौकसी करने जैसे काम करेंगे।
हेलीकॉप्टर से लांच होने वाले सशस्त्र ड्रोन पायलट के साथ सामंजस्य बिठाकर काम करेंगे जिन्हें हेलीकॉप्टर के पंखों या ढांचे से छोड़ा जा सकेगा। ये ड्रोन कम से कम 50 किलोग्राम विस्फोटक ले जा सकेंगे और हेलीकॉप्टर से छोड़े जाने के बाद ये कम से कम 40 किमी दूरी तक जा सकेंगे। ड्रोन हेलीकॉप्टर के पायलट के नियंत्रण में रहेंगे और उसे लगातार वीडियो भेजते रहेंगे ताकि आक्रमण की दिशा निर्धारित की जा सके।
हेलीकॉप्टर से लांच किए जाने वाले स्वार्म ड्रोन का काम शत्रु के क्षेत्र में जाकर जासूसी करना, निगरानी और चौकसी रखना, शत्रु के नुकसान का आकलन करा होगा। साथ ही ये सारे काम करते समय अपनी अत्यधिक संख्या के कारण शत्रु के एयर डिफेंस को भी विफल करने की क्षमता रखते हैं। ये ड्रोन भी हेलीकॉप्टर से छोड़े जाने के बाद भी पायलट के नियंत्रण में रहेंगे जिन्हें हवा में छोड़े जाने के बाद उड़ान के दौरान भी नए लक्ष्यों पर भेजा जा सकेगा।
भारतीय स्वदेशी रक्षा उद्योग ने दोनों ही तरह के ड्रोन प्रोजेक्ट पर काम करना प्रारंभ कर दिया है।
पिछले एक दशक में सैन्य क्षेत्र में
ड्रोन का प्रयोग बहुत तेज़ी से बढ़ा है और हाल में हुए संघर्षों ने सिद्ध कर दिया है कि ड्रोन युद्धकला में पारंगत होना आवश्यक है। पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध में ईरान के कम मूल्य के ड्रोन ने अमेरिका और इज़रायल के सैनिक ठिकानों को भारी क्षति पहुंचाई है। विशेषकर झुंड में काम करने वाले ड्रोन ने सबसे विश्वसनीय मानी जाने वाली एयर डिफेंस प्रणालियों को भी असफल कर दिया है। भारतीय सेनाएं भी ड्रोन युद्धकौशल में तेज़ी से प्रगति कर रही हैं।