https://hindi.sputniknews.in/20260411/unsc-men-hrimuj-pri-bhriiin-ke-prstaav-ko-riuus-ne-kyon-nhiin-maanaa-msko-ne-btaaii-vjh-10739567.html
UNSC में हॉर्मुज पर बहरीन के प्रस्ताव को रूस ने क्यों नहीं माना? मॉस्को ने बताई वजह
UNSC में हॉर्मुज पर बहरीन के प्रस्ताव को रूस ने क्यों नहीं माना? मॉस्को ने बताई वजह
Sputnik भारत
रूसी विदेश मंत्रालय के अंतरराष्ट्रीय संगठनों विभाग के निदेशक किरील लोग्विनोव ने Sputnik से कहा कि रूस और चीन उस पहल का समर्थन नहीं कर सकते थे जिससे फ़ारस की खाड़ी में रक्तपात को समाप्त करने के प्रयासों में बाधा उत्पन्न होती।
2026-04-11T15:21+0530
2026-04-11T15:21+0530
2026-04-11T15:21+0530
विश्व
ईरान
अमेरिका-इजराइल-ईरान युद्ध
रूसी विदेश मंत्रालय
ऊर्जा क्षेत्र
तेल
तेल का आयात
मध्य पूर्व
तेल उत्पादन
https://cdn1.img.sputniknews.in/img/07e9/06/0e/9287228_0:17:3582:2032_1920x0_80_0_0_66ae7200b325dd7a00327f6f682ca575.jpg
मंगलवार को रूस और चीन ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से जुड़े संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के मसौदा प्रस्ताव को वीटो कर दिया। संयुक्त राष्ट्र में रूस के स्थायी प्रतिनिधि वासिली नेबेंज़िया ने कहा कि रूस ऐसे प्रस्ताव का समर्थन नहीं कर सकता था "जो अंतरराष्ट्रीय कानून के लिए एक खतरनाक मिसाल बन सकता था।"उन्होंने यह भी कहा कि बहरीन के प्रस्ताव में अरब देशों पर हुए हमलों की निंदा की गई है और उन्हें रोकने की मांग की गई है। लोग्विनोव के मुताबिक, इससे यह साफ संकेत मिलता है कि सुरक्षा परिषद के अधिकांश सदस्य इन देशों को "अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के खिलाफ बिना किसी उकसावे के शुरू किए गए आक्रमण का बंधक" मानते हैं।रूसी राजनयिक ने आगे कहा कि यह दस्तावेज असंतुलित था। उनके अनुसार, इसमें ईरान से जुड़े घटनाक्रम की पूरी तस्वीर पेश नहीं की गई, खासकर ईरान के खिलाफ युद्ध भड़काने वाले वास्तविक पक्ष की पहचान नहीं की गई।28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल ने तेहरान सहित ईरान के कई शहरों पर हमले शुरू किए। उन हमलों के जवाब में ईरान ने इज़राइल और मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। बढ़ते संघर्ष के बीच हर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है। यह जलडमरूमध्य वैश्विक बाजारों के लिए तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस की आपूर्ति का एक प्रमुख मार्ग है।
https://hindi.sputniknews.in/20260411/horimuj-striet-apne-aap-khul-jaaegaa-iiriaan-se-smjhaute-pri-trinp-kaa-bdaa-daavaa-10738138.html
ईरान
मध्य पूर्व
Sputnik भारत
feedback.hindi@sputniknews.com
+74956456601
MIA „Rossiya Segodnya“
2026
Sputnik भारत
feedback.hindi@sputniknews.com
+74956456601
MIA „Rossiya Segodnya“
खबरें
hi_IN
Sputnik भारत
feedback.hindi@sputniknews.com
+74956456601
MIA „Rossiya Segodnya“
https://cdn1.img.sputniknews.in/img/07e9/06/0e/9287228_426:0:3157:2048_1920x0_80_0_0_a7e6285074f1803fcbc2cf24b99d5c0a.jpgSputnik भारत
feedback.hindi@sputniknews.com
+74956456601
MIA „Rossiya Segodnya“
किरील लोग्विनोव, रूसी विदेश मंत्रालय, अमेरिका-इजराइल-ईरान युद्ध, हर्मुज़ जलडमरूमध्य, बहरीन का प्रस्ताव, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, मध्य पूर्व
किरील लोग्विनोव, रूसी विदेश मंत्रालय, अमेरिका-इजराइल-ईरान युद्ध, हर्मुज़ जलडमरूमध्य, बहरीन का प्रस्ताव, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, मध्य पूर्व
UNSC में हॉर्मुज पर बहरीन के प्रस्ताव को रूस ने क्यों नहीं माना? मॉस्को ने बताई वजह
रूस ने कहा है कि वह ऐसी किसी पहल का समर्थन नहीं कर सकता, जो फारस की खाड़ी में जारी रक्तपात रोकने की कोशिशों में रुकावट डाले। रूसी विदेश मंत्रालय के अंतरराष्ट्रीय संगठनों विभाग के निदेशक किरिल लोग्विनोव ने यह बात हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पर बहरीन के प्रस्ताव को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में हुई वोटिंग के बाद कही।
मंगलवार को रूस और चीन ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से जुड़े संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के मसौदा प्रस्ताव को वीटो कर दिया। संयुक्त राष्ट्र में रूस के स्थायी प्रतिनिधि वासिली नेबेंज़िया ने कहा कि रूस ऐसे प्रस्ताव का समर्थन नहीं कर सकता था "जो अंतरराष्ट्रीय कानून के लिए एक खतरनाक मिसाल बन सकता था।"
लोग्विनोव ने कहा, "हम ऐसी किसी पहल का समर्थन नहीं कर सकते थे जो फारस की खाड़ी में रक्तपात को जल्द खत्म करने और संघर्ष का राजनीतिक तथा कूटनीतिक समाधान तलाशने की कोशिशों में रुकावट पैदा करे।"
उन्होंने यह भी कहा कि बहरीन के प्रस्ताव में अरब देशों पर हुए हमलों की निंदा की गई है और उन्हें रोकने की मांग की गई है। लोग्विनोव के मुताबिक, इससे यह साफ संकेत मिलता है कि सुरक्षा परिषद के अधिकांश सदस्य इन देशों को "अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के खिलाफ बिना किसी उकसावे के शुरू किए गए आक्रमण का बंधक" मानते हैं।
रूसी राजनयिक ने आगे कहा कि यह दस्तावेज असंतुलित था। उनके अनुसार, इसमें ईरान से जुड़े घटनाक्रम की पूरी तस्वीर पेश नहीं की गई, खासकर ईरान के खिलाफ युद्ध भड़काने वाले वास्तविक पक्ष की पहचान नहीं की गई।
28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल ने तेहरान सहित ईरान के कई शहरों पर हमले शुरू किए। उन हमलों के जवाब में ईरान ने इज़राइल और मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। बढ़ते संघर्ष के बीच
हर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है। यह जलडमरूमध्य वैश्विक बाजारों के लिए तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस की आपूर्ति का एक प्रमुख मार्ग है।