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भारतीय सेना, इसके देशी और विदेशी भागीदारों और प्रतिद्वन्द्वियों की गरमा गरम खबरें।

पहलगाम आतंकी हमले के एक वर्ष में कैसे बदल गई भारतीय सेना

© AP Photo / Manish SwarupArmoured division of Indian army marches through the ceremonial Rajpath boulevard during India's Republic Day celebrations, in New Delhi, India, Wednesday, Jan. 26, 2022.
Armoured division of Indian army marches through the ceremonial Rajpath boulevard during India's Republic Day celebrations, in New Delhi, India, Wednesday, Jan. 26, 2022.  - Sputnik भारत, 1920, 22.04.2026
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ऑपरेशन सिंदूर के एक वर्ष में भारतीय सेना ने खुद को तीव्र गति वाले आधुनिक युद्ध के लिए तेज़ी से बदला है। इस बदलाव में ड्रोन युद्धकला, तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल, बहुत कम समय में सामंजस्य के साथ आक्रमण और हवाई हमले से बचाव की नई रणनीति मुख्य है।
संगठन के स्तर पर भी भारतीय सेना ने नई भैरव बटालियन, रुद्र ब्रिगेड और शक्तिबाण आर्टिलरी रेजीमेंट्स का गठन किया है ताकि आक्रमण और बचाव दोनों ही सटीक हों।
पहलगाम में 26 निर्दोष पर्यटकों की आतंकवादियों द्वारा की गई जघन्य हत्या के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच 7 मई से लेकर 10 मई 2025 तक संघर्ष हुआ था। इस संघर्ष से मिले सबक से भारतीय सेनाओं ने खुद को बदलने की प्रक्रिया प्रारंभ की है।

ड्रोन युद्धकला के लिए सेना की हर इंफेंट्री बटालियन में एक अश्नि प्लाटून बनाई गई है। 20 से 25 सैनिकों वाली यह प्लाटून हर तरह के ड्रोन से सज्जित होगी। इसी तरह तोपखाने यानी आर्टिलरी के लिए नई शक्तिबाण रेजीमेंट बनाई जा रही हैं जिनमें ड्रोन, लाइटरिंग म्यूनिशन और ड्रोन रोधी प्रणालियां होंगी। इसके अतिरिक्त हर आर्टिलरी रेजीमेंट में एक दिव्यास्त्र बैटरी होगी जिसमें आक्रमण करने वाले ड्रोन और लाइटिरिंग म्यूनिशन होंगे।

संगठन में बदलाव करते हुए भारतीय सेना ने नई भैरव कमांडो बटालियन बनानी प्रारंभ की हैं। भारतीय सेना की सामान्य बटालियन में लगभग 800 सैनिक होते हैं जबकि पैराशूट रेजीमेंट की स्पेशल फोर्सेज़ 20-25 कमांडो के साथ कार्रवाई करती हैं। भैरव बटालियनें इस अंतर को पाटेंगी जिसमें 200-250 ऐसे कमांडो शामिल होंगे जिन्हें विशेष बलों की तर्ज पर प्रशिक्षित किया गया है। इन्हें तीव्र गति वाले वाहनों और अत्याधुनिक संचार साधनों से सज्जित किया गया है।
रुद्र ब्रिगेड में इंफेंट्री, आर्मर्ड, आर्टिलरी, सिग्नल जैसे सभी अंग होंगे जबकि भारतीय सेना की किसी सामान्य ब्रिगेड में कोई एक अंग ही होता है। उद्देश्य है कि नई रुद्र ब्रिगेड स्वतंत्र रूप से सभी अंगों से साथ तुरंत कार्रवाई करने के लिए तैयार रहे।

रक्षा मंत्रालय के स्तर पर भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच बेहतर सामंजस्य बनाने के लिए कदम उठाए गए हैं। नए उपकरणों की खरीद पर ध्यान दिया गया है और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में वर्ष 2025 में 3.84 लाख करोड़ रुपए के नए सौदों को स्वीकृति दी गई है। इनमें नए मिसाइल सिस्टम, नौसैनिक उपकरण, निगरानी और चौकसी के उपकरणों सहित अत्याधुनिक अस्त्र-शस्त्र शामिल हैं।

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