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यूरोपीय संग्रहालय अनमोल लैटिन अमेरिकी निधियों से भरे हैं: इन्हें वापस लेना क्यों इतना कठिन है?
यूरोपीय संग्रहालय अनमोल लैटिन अमेरिकी निधियों से भरे हैं: इन्हें वापस लेना क्यों इतना कठिन है?
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मैक्सिको के राष्ट्रीय मानवविज्ञान और इतिहास संस्थान के विशेषज्ञ हेवियर मर्टीनेज़ बर्गोस ने Sputnik को बताया कि विदेशी पुरातत्वविदों ने 19वीं और 20वीं शताब्दी... 29.04.2026, Sputnik भारत
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बुर्गोस का अनुमान है कि लैटिन अमेरिका अभी भी विदेशी संग्रहालयों में रखी निधियों के लगभग 90 प्रतिशत के बारे में नहीं जानता है। विशेषज्ञ ने समाधान पेश किया कि विवादों को सुलझाने के लिए एक विशेष इकाई तथा प्रशासनिक, कानूनी और कूटनीतिक संस्थाओं की स्थापना करनी चाहिए। ये संस्थाएं अन्य देशों के साथ मिलकर फ्रांस और जर्मनी से लेकर अमेरिका और ब्रिटेन तक "संग्रहालयों में उन निधियों को ढूंढने के लिए काम कर सकती हैं, जो वहाँ नहीं होनी चाहिए।"बुर्गोस के अनुसार, समस्या यह है कि "उक्त देशों में उन लोगों पर प्रभुत्व के बारे में विचार-विमर्श अभी भी जारी रहता है, जिनसे ये निधियां ली गई थीं।"
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यूरोपीय संग्रहालय अनमोल लैटिन अमेरिकी निधियों से भरे हैं: इन्हें वापस लेना क्यों इतना कठिन है?
मैक्सिको के राष्ट्रीय मानवविज्ञान और इतिहास संस्थान के विशेषज्ञ हेवियर मर्टीनेज़ बर्गोस ने Sputnik को बताया कि विदेशी पुरातत्वविदों ने 19वीं और 20वीं शताब्दी में लैटिन अमेरिकी देशों से "विशाल मात्रा में सामग्री" की निकासी की।
बुर्गोस का अनुमान है कि लैटिन अमेरिका अभी भी विदेशी संग्रहालयों में रखी निधियों के लगभग 90 प्रतिशत के बारे में नहीं जानता है।
इसके अलावा, इन निधियों की काला बाज़ारी भी होती है। बर्गोस ने कहा, "स्थानीय निवासियों ने पुरातात्विक स्थलों को लूट लिया, और इसके बाद इन वस्तुओं को पर्यटकों को बेच दिया।"
विशेषज्ञ ने समाधान पेश किया कि विवादों को सुलझाने के लिए एक विशेष इकाई तथा प्रशासनिक, कानूनी और कूटनीतिक संस्थाओं की स्थापना करनी चाहिए। ये संस्थाएं अन्य देशों के साथ मिलकर फ्रांस और जर्मनी से लेकर अमेरिका और ब्रिटेन तक "संग्रहालयों में उन निधियों को ढूंढने के लिए काम कर सकती हैं, जो वहाँ नहीं होनी चाहिए।"
बुर्गोस के अनुसार, समस्या यह है कि "उक्त देशों में उन लोगों पर
प्रभुत्व के बारे में विचार-विमर्श अभी भी जारी रहता है, जिनसे ये निधियां ली गई थीं।"