https://hindi.sputniknews.in/20260604/do-mhiine-men-bhaaritiiy-nausenaa-ko-milenge-paanch-ne-svdeshii-yuddhpot-11115825.html
दो महीने में भारतीय नौसेना को मिलेंगे पांच नए स्वदेशी युद्धपोत
दो महीने में भारतीय नौसेना को मिलेंगे पांच नए स्वदेशी युद्धपोत
Sputnik भारत
भारतीय नौसेना अगले दो महीने में पांच नए युद्धपोत शामिल करने जा रही है। नौसेना सूत्रों से Sputnik को मिली जानकारी के अनुसार इनमें से दो गाइडेड मिसाइल स्टेल्थ फ्रिगेट, दो पनडुब्बी रोधी पोत और एक बड़ा सर्वेक्षण पोत है।
2026-06-04T15:39+0530
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नीलगिरि श्रेणी के स्टेल्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट दूनागिरि का निर्माण गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स और महेन्द्रगिरी का निर्माण मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स ने किया है। दोनों ही लगभग 6500 टन भारी हैं और इनमें 226 नौसैनिकों की तैनाती की जा सकती है।इनमें स्वदेशी रडार, सोनार और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट लगाए गए हैं। इनका मुख्य अस्त्र लंबी दूरी तक मार करने वाली 8 ब्रह्मोस मिसाइलें हैं। इनके अतिरिक्त हवाई सुरक्षा के लिए इनमें 32 बराक मिसाइलें लगाई गई हैं।कम गहरे पानी में शत्रु की पनडुब्बियों की तलाश कर उन्हें नष्ट करने वाले अग्रेय और मालवन मार्च में भारतीय नौसेना को मिल गए थे और अब उन्हें नौसेना में शामिल करने की तैयारी है। भारत ऐसे 16 युद्धपोत बना रहा है, जिनमें से चार नौसेना में शामिल हो चुके हैं।ये सभी युद्धपोत 900 से 1400 टन के हल्के कार्वेट हैं, जिनमें 57 नौसैनिक तैनात हो सकते हैं। पनडुब्बी की तलाश करने के लिए इनमें स्वदेशी सोनार और अन्य रडार हैं। पनडुब्बियों को नष्ट करने के लिए इन्हें टॉरपीडो, पनडुब्बी रोधी रॉकेट और पनडुब्बी रोधी सुरंगों से लैस किया गया है।संशोधक बड़ा सर्वेक्षण पोत है, जो संध्यायक श्रेणी का चौथा और अंतिम पोत है जिसे नौसेना में शामिल किया जाना है। भारत के पास हिंद महासागर, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी को मिलाकर लगभग 23 लाख वर्ग किलोमीटर का एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक ज़ोन है।सर्वेक्षण पोत इस विशाल समुद्री क्षेत्र में हाइड्रोग्राफी और ओशियनोग्राफी का जटिल और आवश्यक कार्य करते हैं। ये पोत समुद्र के अंदर की संपदा का पता लगाने के अतिरिक्त उसकी सतह और जल बहाव के आंकड़े एकत्र करते हैं, ताकि नौवहन सुरक्षित हो सके।
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भारत, भारतीय नौसेना, फ्रिगेट विंध्यगिरि, ब्रह्मोस , अरब सागर, पनडुब्बी
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दो महीने में भारतीय नौसेना को मिलेंगे पांच नए स्वदेशी युद्धपोत
भारतीय नौसेना अगले दो महीने में पांच नए युद्धपोत शामिल करने जा रही है। नौसेना सूत्रों से Sputnik को मिली जानकारी के अनुसार इनमें से दो गाइडेड मिसाइल स्टेल्थ फ्रिगेट, दो पनडुब्बी रोधी पोत और एक बड़ा सर्वेक्षण पोत है।
नीलगिरि श्रेणी के स्टेल्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट दूनागिरि का निर्माण गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स और महेन्द्रगिरी का निर्माण मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स ने किया है। दोनों ही लगभग 6500 टन भारी हैं और इनमें 226 नौसैनिकों की तैनाती की जा सकती है।
इनमें स्वदेशी रडार, सोनार और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट लगाए गए हैं। इनका मुख्य अस्त्र लंबी दूरी तक मार करने वाली 8 ब्रह्मोस मिसाइलें हैं। इनके अतिरिक्त हवाई सुरक्षा के लिए इनमें 32 बराक मिसाइलें लगाई गई हैं।
कम गहरे पानी में शत्रु की पनडुब्बियों की तलाश कर उन्हें नष्ट करने वाले अग्रेय और मालवन मार्च में भारतीय नौसेना को मिल गए थे और अब उन्हें नौसेना में शामिल करने की तैयारी है। भारत ऐसे 16 युद्धपोत बना रहा है, जिनमें से चार नौसेना में शामिल हो चुके हैं।
ये सभी युद्धपोत 900 से 1400 टन के हल्के कार्वेट हैं, जिनमें 57 नौसैनिक तैनात हो सकते हैं। पनडुब्बी की तलाश करने के लिए इनमें स्वदेशी सोनार और अन्य रडार हैं। पनडुब्बियों को नष्ट करने के लिए इन्हें टॉरपीडो, पनडुब्बी रोधी रॉकेट और पनडुब्बी रोधी सुरंगों से लैस किया गया है।
संशोधक बड़ा सर्वेक्षण पोत है, जो संध्यायक श्रेणी का चौथा और अंतिम पोत है जिसे नौसेना में शामिल किया जाना है। भारत के पास हिंद महासागर, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी को मिलाकर लगभग 23 लाख वर्ग किलोमीटर का एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक ज़ोन है।
सर्वेक्षण पोत इस विशाल समुद्री क्षेत्र में हाइड्रोग्राफी और ओशियनोग्राफी का जटिल और आवश्यक कार्य करते हैं। ये पोत समुद्र के अंदर की संपदा का पता लगाने के अतिरिक्त उसकी सतह और जल बहाव के आंकड़े एकत्र करते हैं, ताकि नौवहन सुरक्षित हो सके।