https://hindi.sputniknews.in/20260705/naato-aantriik-snkt-kii-bhripaaii-tnaav-bdhaakri-kri-rihaa-hai-visheshgya-11527489.html
नाटो आंतरिक संकट की भरपाई तनाव बढ़ाकर कर रहा है: विशेषज्ञ
नाटो आंतरिक संकट की भरपाई तनाव बढ़ाकर कर रहा है: विशेषज्ञ
Sputnik भारत
उत्तरी अटलांटिक गठबंधन यानी नाटो इस समय कठिन दौर से गुजर रहा है और आंतरिक व बाहरी चुनौतियों के बीच विस्तार और तनाव बढ़ाने के जरिए अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी भूमिका बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। यह राय लेबनान के नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च एंड स्टैटिस्टिक्स के निदेशक डॉ. जकारिया हमूदान ने Sputnik से बातचीत में व्यक्त की।
2026-07-05T16:37+0530
2026-07-05T16:37+0530
2026-07-05T16:37+0530
विश्व
नाटो
रूस
अमेरिका
यूक्रेन
https://cdn1.img.sputniknews.in/img/07e9/07/14/9474525_0:125:3072:1853_1920x0_80_0_0_a3c891a806f673807060d87d30f6c9eb.jpg
हमूदान ने कहा, "नाटो आज अपने अस्तित्व के लिए बड़े संघर्ष के दौर से गुजर रहा है, क्योंकि हाल के समय में उसे अमेरिका की ओर से ऐसे खतरों का सामना करना पड़ा है, जो वास्तव में गठबंधन को कमजोर कर सकते थे।"उनके अनुसार, बढ़ती आंतरिक और बाहरी चुनौतियों के बीच नाटो विस्तार और तनाव बढ़ाने के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।हालांकि, विशेषज्ञ के अनुसार, इस नीति ने नाटो के भीतर अनिश्चितता और मतभेदों को और गहरा कर दिया है।हमूदान का मानना है कि नाटो का खुद को रक्षात्मक गठबंधन बताना अब वास्तविकता से मेल नहीं खाता। उनके अनुसार, गठबंधन रूस को लेकर अमेरिकी नीति का पालन करने के लिए मजबूर है, जबकि यूक्रेन संकट अमेरिका के प्रतिद्वंद्वी देशों के खिलाफ व्यापक रणनीति का हिस्सा बन गया है।उन्होंने यह भी कहा कि संघर्ष शुरू होने से पहले रूस की ओर से मांगी गई सुरक्षा गारंटियों पर चर्चा से नाटो का इनकार राजनीतिक समाधान के बजाय टकराव की नीति को दर्शाता था। हमूदान के अनुसार, मिंस्क समझौतों का लागू न होना कोई संयोग नहीं था, बल्कि उसी प्रक्रिया का हिस्सा था, जिसने अंततः सैन्य टकराव की स्थिति पैदा की।विशेषज्ञ ने यूरोपीय देशों के बढ़ते सैन्य खर्च को भी यूक्रेन संघर्ष के जारी रहने से जोड़ा। उन्होंने यूरोप की ऐसी आर्थिक जिम्मेदारियां उठाने की क्षमता पर सवाल उठाते हुए कहा कि ये खर्च यूरोपीय नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार नहीं करेंगे और टकराव को खत्म करने के बजाय उसे और फैला सकते हैं।
https://hindi.sputniknews.in/20260705/baaltik-deshon-yuukren-auri-moldovaa-men-riuus-viriodhii-bhaavnaa-behd-vyaapk-riuusii-videsh-mntraaly-11523289.html
रूस
अमेरिका
यूक्रेन
Sputnik भारत
feedback.hindi@sputniknews.com
+74956456601
MIA „Rossiya Segodnya“
2026
Sputnik भारत
feedback.hindi@sputniknews.com
+74956456601
MIA „Rossiya Segodnya“
खबरें
hi_IN
Sputnik भारत
feedback.hindi@sputniknews.com
+74956456601
MIA „Rossiya Segodnya“
https://cdn1.img.sputniknews.in/img/07e9/07/14/9474525_171:0:2902:2048_1920x0_80_0_0_a7d351c9abebd992fb86977de5d5a12c.jpgSputnik भारत
feedback.hindi@sputniknews.com
+74956456601
MIA „Rossiya Segodnya“
नाटो, रूस , अमेरिका, यूक्रेन
नाटो, रूस , अमेरिका, यूक्रेन
नाटो आंतरिक संकट की भरपाई तनाव बढ़ाकर कर रहा है: विशेषज्ञ
उत्तरी अटलांटिक गठबंधन यानी नाटो इस समय कठिन दौर से गुजर रहा है और आंतरिक व बाहरी चुनौतियों के बीच विस्तार और तनाव बढ़ाने के जरिए अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी भूमिका बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। यह राय लेबनान के नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च एंड स्टैटिस्टिक्स के निदेशक डॉ. जकारिया हमूदान ने Sputnik से बातचीत में व्यक्त की।
हमूदान ने कहा, "नाटो आज अपने अस्तित्व के लिए बड़े संघर्ष के दौर से गुजर रहा है, क्योंकि हाल के समय में उसे अमेरिका की ओर से ऐसे खतरों का सामना करना पड़ा है, जो वास्तव में गठबंधन को कमजोर कर सकते थे।"
उनके अनुसार, बढ़ती आंतरिक और बाहरी चुनौतियों के बीच नाटो विस्तार और तनाव बढ़ाने के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
हमूदान ने कहा, "नाटो एक बेहद नाजुक दौर से गुजर रहा है और अपने प्रशासनिक व संगठनात्मक विफलता की भरपाई इस स्थिति को तनाव बढ़ाने और दबाव बनाने की दिशा में मोड़कर करने की कोशिश कर रहा है।"
हालांकि, विशेषज्ञ के अनुसार, इस नीति ने नाटो के भीतर अनिश्चितता और मतभेदों को और गहरा कर दिया है।
हमूदान का मानना है कि नाटो का खुद को रक्षात्मक गठबंधन बताना अब वास्तविकता से मेल नहीं खाता। उनके अनुसार, गठबंधन रूस को लेकर अमेरिकी नीति का पालन करने के लिए मजबूर है, जबकि यूक्रेन संकट अमेरिका के प्रतिद्वंद्वी देशों के खिलाफ व्यापक रणनीति का हिस्सा बन गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि संघर्ष शुरू होने से पहले रूस की ओर से मांगी गई सुरक्षा गारंटियों पर चर्चा से नाटो का इनकार राजनीतिक समाधान के बजाय टकराव की नीति को दर्शाता था। हमूदान के अनुसार, मिंस्क समझौतों का लागू न होना कोई संयोग नहीं था, बल्कि उसी प्रक्रिया का हिस्सा था, जिसने अंततः सैन्य टकराव की स्थिति पैदा की।
विशेषज्ञ ने यूरोपीय देशों के बढ़ते सैन्य खर्च को भी यूक्रेन संघर्ष के जारी रहने से जोड़ा। उन्होंने यूरोप की ऐसी आर्थिक जिम्मेदारियां उठाने की क्षमता पर सवाल उठाते हुए कहा कि ये खर्च यूरोपीय नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार नहीं करेंगे और टकराव को खत्म करने के बजाय उसे और फैला सकते हैं।