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सांस की जांच से चल सकता है दिल की बीमारी का पता, रूसी वैज्ञानिकों ने खोजा नया तरीका
सांस की जांच से चल सकता है दिल की बीमारी का पता, रूसी वैज्ञानिकों ने खोजा नया तरीका
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रूस के सेचेनोव विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने व्यक्ति की सांस के जरिए इस्केमिक हृदय रोग के संकेतों की पहचान करने का नया तरीका खोजा है। विश्वविद्यालय की प्रेस सेवा के मुताबिक भविष्य में इस तकनीक का इस्तेमाल दिल की स्थिति के शुरुआती आकलन के लिए किया जा सकता है।
2026-07-14T12:47+0530
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वैज्ञानिकों ने पाया कि व्यायाम के बाद सांस में मौजूद वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों की संरचना में बदलाव आता है। इन बदलावों के आधार पर हृदय की मांसपेशियों तक रक्त की आपूर्ति में गड़बड़ी वाले मरीजों को दूसरे प्रतिभागियों से अलग किया जा सकता है।इस अध्ययन में कुल 80 लोगों ने हिस्सा लिया। इनमें 31 मरीजों में कंप्यूटेड टोमोग्राफी के जरिए हृदय की मांसपेशियों तक रक्त आपूर्ति की समस्या की पुष्टि हुई थी। वहीं 49 लोगों को तुलना के लिए कंट्रोल ग्रुप में रखा गया।शोध के दौरान सभी प्रतिभागियों की सांस के नमूने आराम की स्थिति में और व्यायाम साइकिल पर परीक्षण के बाद लिए गए। इन नमूनों का उच्च-रिजॉल्यूशन प्रोटॉन मास स्पेक्ट्रोमेट्री से विश्लेषण किया गया। इसके बाद प्राप्त आंकड़ों की मशीन लर्निंग एल्गोरिदम की मदद से जांच की गई।शोधकर्ताओं के अनुसार एल्गोरिदम इस्केमिक हृदय रोग के संकेतों वाले लगभग 77 प्रतिशत मरीजों की सही पहचान करने में सफल रहा।हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि इस तकनीक को अस्पतालों में इस्तेमाल करने से पहले बड़े स्तर पर इसका परीक्षण करना जरूरी है।
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सांस की जांच से चल सकता है दिल की बीमारी का पता, रूसी वैज्ञानिकों ने खोजा नया तरीका
रूस के सेचेनोव विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने व्यक्ति की सांस के जरिए इस्केमिक हृदय रोग के संकेतों की पहचान करने का नया तरीका खोजा है। विश्वविद्यालय की प्रेस सेवा के मुताबिक भविष्य में इस तकनीक का इस्तेमाल दिल की स्थिति के शुरुआती आकलन के लिए किया जा सकता है।
विश्वविद्यालय ने बताया, "शारीरिक व्यायाम के बाद छोड़ी गई सांस की संरचना में होने वाले बदलावों से इस्केमिक हृदय रोग के संकेतों का पता लगाया जा सकता है।"
वैज्ञानिकों ने पाया कि व्यायाम के बाद सांस में मौजूद वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों की संरचना में बदलाव आता है। इन बदलावों के आधार पर हृदय की मांसपेशियों तक रक्त की आपूर्ति में गड़बड़ी वाले मरीजों को दूसरे प्रतिभागियों से अलग किया जा सकता है।
इस अध्ययन में कुल 80 लोगों ने हिस्सा लिया। इनमें 31 मरीजों में कंप्यूटेड टोमोग्राफी के जरिए हृदय की मांसपेशियों तक रक्त आपूर्ति की समस्या की पुष्टि हुई थी। वहीं 49 लोगों को तुलना के लिए कंट्रोल ग्रुप में रखा गया।
शोध के दौरान सभी प्रतिभागियों की सांस के नमूने आराम की स्थिति में और व्यायाम साइकिल पर परीक्षण के बाद लिए गए। इन नमूनों का उच्च-रिजॉल्यूशन प्रोटॉन मास स्पेक्ट्रोमेट्री से विश्लेषण किया गया। इसके बाद प्राप्त आंकड़ों की मशीन लर्निंग एल्गोरिदम की मदद से जांच की गई।
शोधकर्ताओं के अनुसार एल्गोरिदम इस्केमिक हृदय रोग के संकेतों वाले लगभग 77 प्रतिशत मरीजों की सही पहचान करने में सफल रहा।
हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि इस तकनीक को अस्पतालों में इस्तेमाल करने से पहले बड़े स्तर पर इसका परीक्षण करना जरूरी है।
विश्वविद्यालय की प्रेस सेवा ने कहा, "इस विधि को क्लिनिकल प्रैक्टिस में लागू करने की बात करना अभी जल्दबाजी होगी। पहले इसे मरीजों के बड़े समूहों पर जांचना होगा। भविष्य में यह विश्लेषण दिल की स्थिति के प्रारंभिक आकलन के लिए एक अतिरिक्त उपकरण बन सकता है।"