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PM मोदी ने भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना
PM मोदी ने भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को भारत की पहली हाइड्रोजन ईंधन से चलने वाली ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह ट्रेन हरियाणा में जींद और सोनीपत के बीच 89 किलोमीटर लंबे मार्ग पर चलेगी। इसकी संचालन गति 75 किलोमीटर प्रति घंटा, जबकि डिजाइन गति 110 किलोमीटर प्रति घंटा है।
2026-07-17T14:40+0530
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कुल 10 डिब्बों वाली यह ट्रेन दुनिया की सबसे लंबी और शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेनों में से एक है। इसमें लगी दो पावर कार कुल 3,200 हॉर्सपावर की शक्ति उत्पन्न करती हैं। इस ट्रेन में 2,600 यात्रियों को ले जाने की क्षमता है। इसे स्वदेशी तकनीक से भारत में ही डिजाइन, विकसित और तैयार किया गया है।यात्रियों की सुरक्षा के लिए इसमें उच्च मानक अपनाए गए हैं। ट्रेन में कई स्तर की सुरक्षा प्रणालियां लगाई गई हैं, जो हाइड्रोजन के रिसाव, तापमान बढ़ने, आग या धुएं का कुछ ही सेकंड में पता लगा सकती हैं।ट्रेन में हाइड्रोजन भरने के लिए जींद में देश का सबसे बड़ा रेलवे हाइड्रोजन भंडारण और ईंधन भरने का केंद्र बनाया गया है। इसमें 3,000 किलोग्राम तक हाइड्रोजन का भंडारण किया जा सकता है। जींद में ही हाइड्रोजन का उत्पादन भी किया जाएगा।भारतीय रेलवे प्रणाली दुनिया की चौथी सबसे बड़ी रेल सेवा है, जिसके रेलमार्ग की लंबाई 69,181 किलोमीटर है। इसके 99 प्रतिशत से अधिक ब्रॉड गेज मार्गों का विद्युतीकरण किया जा चुका है।कोयले और डीजल से चलने वाले इंजनों की तुलना में बिजली से चलने वाले इंजन बहुत कम प्रदूषण करते हैं। हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन भी पर्यावरण के अनुकूल है, क्योंकि संचालन के दौरान इससे मुख्य रूप से जलवाष्प का उत्सर्जन होता है।ट्रेन में मौजूद हाइड्रोजन जब वायुमंडलीय ऑक्सीजन के साथ रासायनिक क्रिया करती है, तो बिजली पैदा होती है। इसी बिजली से ट्रेन आगे बढ़ती है। इस प्रक्रिया में किसी तरह का दहन नहीं होता और न ही धुआं या प्रत्यक्ष कार्बन उत्सर्जन होता है।भारत के अलावा जर्मनी, जापान, चीन और अमेरिका समेत कुछ अन्य देशों में भी हाइड्रोजन आधारित रेल परिवहन का इस्तेमाल या परीक्षण किया जा रहा है।
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PM मोदी ने भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना
14:40 17.07.2026 (अपडेटेड: 14:49 17.07.2026) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को भारत की पहली हाइड्रोजन ईंधन से चलने वाली ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह ट्रेन हरियाणा में जींद और सोनीपत के बीच 89 किलोमीटर लंबे मार्ग पर चलेगी। इसकी संचालन गति 75 किलोमीटर प्रति घंटा, जबकि डिजाइन गति 110 किलोमीटर प्रति घंटा है।
कुल 10 डिब्बों वाली यह ट्रेन दुनिया की सबसे लंबी और शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेनों में से एक है। इसमें लगी दो पावर कार कुल 3,200 हॉर्सपावर की शक्ति उत्पन्न करती हैं। इस ट्रेन में 2,600 यात्रियों को ले जाने की क्षमता है। इसे स्वदेशी तकनीक से भारत में ही डिजाइन, विकसित और तैयार किया गया है।
यात्रियों की सुरक्षा के लिए इसमें उच्च मानक अपनाए गए हैं। ट्रेन में कई स्तर की सुरक्षा प्रणालियां लगाई गई हैं, जो हाइड्रोजन के रिसाव, तापमान बढ़ने, आग या धुएं का कुछ ही सेकंड में पता लगा सकती हैं।
ट्रेन में हाइड्रोजन भरने के लिए जींद में देश का सबसे बड़ा रेलवे हाइड्रोजन भंडारण और ईंधन भरने का केंद्र बनाया गया है। इसमें 3,000 किलोग्राम तक हाइड्रोजन का भंडारण किया जा सकता है। जींद में ही हाइड्रोजन का उत्पादन भी किया जाएगा।
भारतीय रेलवे प्रणाली दुनिया की चौथी सबसे बड़ी रेल सेवा है, जिसके रेलमार्ग की लंबाई 69,181 किलोमीटर है। इसके 99 प्रतिशत से अधिक ब्रॉड गेज मार्गों का विद्युतीकरण किया जा चुका है।
कोयले और डीजल से चलने वाले इंजनों की तुलना में बिजली से चलने वाले इंजन बहुत कम प्रदूषण करते हैं। हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन भी पर्यावरण के अनुकूल है, क्योंकि संचालन के दौरान इससे मुख्य रूप से जलवाष्प का उत्सर्जन होता है।
ट्रेन में मौजूद हाइड्रोजन जब वायुमंडलीय ऑक्सीजन के साथ रासायनिक क्रिया करती है, तो बिजली पैदा होती है। इसी बिजली से ट्रेन आगे बढ़ती है। इस प्रक्रिया में किसी तरह का दहन नहीं होता और न ही धुआं या प्रत्यक्ष कार्बन उत्सर्जन होता है।
भारत के अलावा जर्मनी, जापान, चीन और अमेरिका समेत कुछ अन्य देशों में भी हाइड्रोजन आधारित रेल परिवहन का इस्तेमाल या परीक्षण किया जा रहा है।