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पश्चिम एशिया तनाव के बीच भारत की 7.7% वृद्धि देश की मजबूती का प्रमाण: पीएम मोदी
पश्चिम एशिया तनाव के बीच भारत की 7.7% वृद्धि देश की मजबूती का प्रमाण: पीएम मोदी
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भारत के पीएम नरेंद्र मोदी ने सोमवार को संसद के मॉनसून सत्र की शुरुआत से पहले पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को एक बहुत बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर है।
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भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को संसद के मॉनसून सत्र की शुरुआत से पहले पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को एक बहुत बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर है।भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए रूस से तेल आयात करना जारी रखा और इस संकट से लड़ने में मास्को ने दिल्ली को ऊर्जा संकट से लड़ने में मदद की।अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद 28 फरवरी से शुरू हुआ यह युद्ध लगातार 39 दिनों तक चला। इस दौरान ईरान ने न केवल क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर पलटवार किया, बल्कि दुनिया की आर्थिक लाइफलाइन माने जाने वाले 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़' को भी बंद कर दिया। इसके चलते दुनिया भर में ऊर्जा, उर्वरक और रसायनों का गंभीर संकट पैदा हो गया। हालत यह है कि तब से लेकर आज तक यह समुद्री मार्ग पूरी तरह से सामान्य नहीं हो पाया है।39 दिन के बाद युद्ध विराम हुआ जो 2 महीने से अधिक समय तक चला, हालांकि इस दौरान भी दोनों पक्ष सीमित मात्रा में हमले करते रहे। इसके बाद 17 जून को ईरान और अमेरिका ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।लेकिन कुछ हफ़्ते बाद ही अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने समझौते के खत्म होने का ऐलान कर दिया और तब से वाशिंगटन और तेहरान के बीच लगातार हमले जारी हैं, अमेरिकी हमले का जवाब देते हुए ईरान ने क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को जमकर निशाना बनाया जिसमें 3 अमेरिकी जवानों की मौत हो गई।
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पश्चिम एशिया तनाव के बीच भारत की 7.7% वृद्धि देश की मजबूती का प्रमाण: पीएम मोदी
प्रधानमंत्री ने एक अच्छे मॉनसून सत्र की अपील करते हुए सभी पार्टियों के सांसदों से कहा कि वे ऐसी सार्थक चर्चा करें जो देश को आगे बढ़ाने में मदद करें। संसद का मॉनसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलेगा।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को संसद के मॉनसून सत्र की शुरुआत से पहले पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को एक बहुत बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर है।
पीएम मोदी ने कहा, "इस युद्ध ने पेट्रोल, डीजल, LPG, उर्वरकों और रसायनों की आपूर्ति में रुकावट डाली, जिससे कई क्षेत्रों ने मुश्किलों और संकट का सामना किया। इन चुनौतियों के बावजूद, भारत की अर्थव्यवस्था 7.7% की दर से बढ़ती रही, और भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहा।"
भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए रूस से तेल आयात करना जारी रखा और इस संकट से लड़ने में मास्को ने दिल्ली को ऊर्जा संकट से लड़ने में मदद की।
अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद 28 फरवरी से शुरू हुआ यह युद्ध लगातार 39 दिनों तक चला। इस दौरान ईरान ने न केवल क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर पलटवार किया, बल्कि दुनिया की आर्थिक लाइफलाइन माने जाने वाले 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़' को भी बंद कर दिया। इसके चलते दुनिया भर में ऊर्जा, उर्वरक और रसायनों का गंभीर संकट पैदा हो गया। हालत यह है कि तब से लेकर आज तक यह समुद्री मार्ग पूरी तरह से सामान्य नहीं हो पाया है।
39 दिन के बाद युद्ध विराम हुआ जो 2 महीने से अधिक समय तक चला, हालांकि इस दौरान भी दोनों पक्ष सीमित मात्रा में हमले करते रहे। इसके बाद 17 जून को ईरान और अमेरिका ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।
लेकिन कुछ हफ़्ते बाद ही अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने समझौते के खत्म होने का ऐलान कर दिया और तब से वाशिंगटन और तेहरान के बीच लगातार हमले जारी हैं, अमेरिकी हमले का जवाब देते हुए ईरान ने क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को जमकर निशाना बनाया जिसमें 3 अमेरिकी जवानों की मौत हो गई।