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भारतीय वायुसेना का सबसे पुराना लड़ाकू हेलीकॉप्टर नए ड्रोन रोधी अवतार में

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भारतीय वायुसेना के सबसे विश्वसनीय और पुराने लड़ाकू हेलीकॉप्टर Mi-35 ने पिछले सप्ताह समाप्त हुए अभ्यास में अपनी पुरानी भूमिका से अलग नई ड्रोन रोधी भूमिका में भाग लिया।
रोटर क्लैप-3 नामक अभ्यास में भारतीय वायुसेना ने राजस्थान के रेगिस्तानी क्षेत्र में शत्रु के ड्रोन आक्रमणों का हेलीकॉप्टर से प्रतिरोध करने की क्षमता का आंकलन किया।
पिछले कुछ वर्षों में सैन्य अभियानों में ड्रोन मुख्य अस्त्र बनकर उभरे हैं। भारतीय सेना और वायुसेना दोनों ही ड्रोन रोधी क्षमता को लगातार सुदृढ़ कर रही हैं। अलग-अलग ड्रोन रोधी शस्त्रों के बीच हेलीकॉप्टर को बड़े आकार के भारी ड्रोन के संहारक की भूमिका के लिए तैयार किया जा रहा है।
रोटर क्लैप-3 नामक इस अभ्यास में Mi-35 के अतिरिक्त वायुसेना के एक अन्य परखे हुए मध्यम भार श्रेणी के हेलीकॉप्टर Mi-17 के सशस्त्र संस्करण Mi-17 1V ने भी भाग लिया।
लगभग तीन दशक तक Mi-35 भारतीय वायुसेना का एकमात्र लड़ाकू हेलीकॉप्टर रहा है। इसे शत्रु के टैंकों, मोर्चाबंदियों के विरुद्ध तीव्र गति के आक्रमण के लिए बनाया गया है। इसमें टैंक रोधी गाइडेड मिसाइलों के अतिरिक्त 80 मिमी के रॉकेट लगे हैं। इसके अतिरिक्त इसमें 12.7 मिमी की चार बैरल वाली मशीनगन नोज़ गन के तौर पर लगाई गई है। यह 310 किमी की तीव्र गति से उड़ान भर सकता है।
Mi-35 का भारतीय वायुसेना में शामिल होना 1990 के दशक में प्रारंभ हुआ था और अभी भी इनकी संख्या 15 से अधिक है। Mi-35 ने लंबे समय के बाद रोटर क्लैप-3 अभ्यास में भाग लिया। भारतीय वायुसेना के Mi-35 का हाल के वर्षों में रूस में ओवरहॉल किया गया है और यह अभी कई वर्षों तक भारतीय वायुसेना में कार्य करेगा।
Tejas - Sputnik भारत, 1920, 05.08.2026
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