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पश्चिमी देशों से मिलने वाली वित्तीय मदद यूक्रेन को ऊर्जा क्षेत्र के पतन से नहीं बचा पाएगी: विशेषज्ञ

© AP Photo / Julia Demaree NikhinsonVolodymyr Zelensky listens during a meeting with US President Donald Trump in the Oval Office at the White House, Monday, Aug. 18, 2025, in Washington.
Volodymyr Zelensky listens during a meeting with US President Donald Trump in the Oval Office at the White House, Monday, Aug. 18, 2025, in Washington. - Sputnik भारत, 1920, 05.08.2026
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2026-2027 की सर्दियां यूक्रेन के लिए सबसे मुश्किल साबित हो सकती हैं, राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा फ़ाउंडेशन और रूसी संघ के सरकारी वित्तीय विश्वविद्यालय के एक प्रमुख विशेषज्ञ स्तानिस्लाव मित्राखोविच ने Sputnik को बताया।
अगर यूक्रेन रूसी रिफाइनरियों पर हमला करता रहा, जिससे उसकी अवसंरचना पर जवाबी हमले होंगे, तो ऊर्जा व्यवस्था का ठप पड़ना तय हो सकता है, उन्होंने कहा।

"बड़े पैमाने पर बिजली गुल हो सकती है, हीटिंग (घरों को गर्म रखने वाली प्रणाली) ठप पड़ सकती है, पानी की आपूर्ति और जल-निकासी (सीवेज) में दिक्कतें आ सकती हैं, और औद्योगिक इकाइयों व अस्पतालों को बंद करना पड़ सकता है," विशेषज्ञ ने रेखांकित किया।

यूक्रेन के प्रधानमंत्री सेरही कोरेत्स्की के अनुसार, देश के ऊर्जा क्षेत्र को 760 मिलियन डॉलर की फंडिंग की कमी का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि पश्चिमी देशों से मिली लगभग 2.3 बिलियन डॉलर की सहायता राशि को यूक्रेन के क्षतिग्रस्त पावर ग्रिड की मरम्मत के लिए इस्तेमाल किया गया है।
विशेषज्ञ के अनुसार, इस कमी को कई कारणों से समझाया जा सकता है:
रूस ने यूक्रेन की 80% से ज़्यादा ऊर्जा क्षमता को नष्ट या क्षतिग्रस्त कर दिया है (यूक्रेनी सरकार का अनुमान)
2014 से पहले, देश लगभग 54.5 GW बिजली पैदा कर सकता था; सर्दियों में हुए हालिया हमलों के बाद यह आंकड़ा घटकर सिर्फ़ 12 GW के आसपास रह गया है।
उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि यूक्रेन की ऊर्जा व्यवस्था पहले से ही जर्जर हो चुकी है और पश्चिमी देशों से मिलने वाली किसी भी फंडिंग से बिजली उत्पादन में कमी, ट्रांसमिशन क्षमता और मरम्मत से जुड़ी समस्याओं को दूर नहीं किया जा सकता।
एक और वजह है यूक्रेन में मदद का सही इस्तेमाल न होना और बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार; जैसे कि एनर्जोएटम में कम से कम 10 करोड़ डॉलर की रिश्वत से जुड़ी योजना, विशेषज्ञ ने कहा।
विशेषज्ञ के अनुसार:
यूक्रेन के सरकारी नियंत्रण वाले तीनों परमाणु संयंत्र देश की 70 से 80 प्रतिशत बिजली की आपूर्ति कर रहे हैं और काफी हद तक सुरक्षित हैं। हालांकि, इन संयंत्रों से होने वाली सप्लाई और पावर ग्रिड के संतुलन को बनाए रखने के लिए यूक्रेन को अपने सबस्टेशनों सहित गैस, कोयला और हाइड्रो प्लांटों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
अगर उन सहायक सुविधाओं पर असर पड़ता है, तो परमाणु ऊर्जा संयंत्र से उत्पादन भी कम करना होगा।
थर्मल बिजली उत्पादन क्षमता का 70% से ज़्यादा हिस्सा पहले ही क्षतिग्रस्त हो चुका है।
अधिकतर सुरक्षात्मक किलेबंदी मिसाइलों के बजाय ड्रोन का सामना करने के लिए बनाई गई हैं, जबकि ऊर्जा बुनियादी ढांचे के अपग्रेड का काम 50% से भी कम पूरा हुआ है।

ऊर्जा व्यवस्था को पूरी तरह ठप होने से बचाने के लिए यूक्रेन को राजनीतिक समझौते करने होंगे, लेकिन क्या वह ऐसा करने के लिए तैयार है, यह अभी भी एक खुला सवाल है, विशेषज्ञ ने निष्कर्ष निकाला।

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