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भारत समेत एशियाई बाजारों तक पहुंच बढ़ाएगा रूस का ट्रांस-आर्कटिक कॉरिडोर

© Sputnik / Dmitry Dubov / मीडियाबैंक पर जाएंLenin nuclear icebreaker towing for maintenance
Lenin nuclear icebreaker towing for maintenance - Sputnik भारत, 1920, 02.09.2026
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रूस का ट्रांस-आर्कटिक परिवहन कॉरिडोर भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया, फारस की खाड़ी और अफ्रीका तक माल पहुंचाने के लिए नया अंतरराष्ट्रीय मार्ग बन सकता है। इस परियोजना पर व्लादिवोस्तोक में पूर्वी आर्थिक मंच (EEF-2026) के 'उत्तरी समुद्री मार्ग से ट्रांस-आर्कटिक कॉरिडोर तक: संवाद से साझा नौवहन की ओर' सत्र में चर्चा हुई।
रूस की परमाणु ऊर्जा निगम रोसाटॉम के महानिदेशक अलेक्सेई लिखाचेव ने कहा, "रोसाटॉम उत्तरी समुद्री मार्ग पर भरोसे और सहयोग का माहौल तैयार कर रहा है। अब मुख्य कार्य पूरे ट्रांस-आर्कटिक कॉरिडोर में ऐसा ही सहयोग और आकर्षक बुनियादी ढांचा विकसित करना है।"
परियोजना में उत्तरी समुद्री मार्ग के साथ रेलवे, बंदरगाह, नदी परिवहन और विमानन बुनियादी ढांचे को एक प्रणाली में जोड़ने की योजना है। इसके जरिए रूस एशिया और यूरोप के बीच पारंपरिक समुद्री मार्गों का विकल्प तैयार करना चाहता है।
सत्र में बताया गया कि यह कॉरिडोर भविष्य में स्वेज नहर से होने वाले कम से कम 15 प्रतिशत माल परिवहन को अपनी ओर आकर्षित कर सकता है। परियोजना के विकास के लिए 2035 तक करीब 10 ट्रिलियन रूबल के निवेश की जरूरत पड़ने का अनुमान है। यह राशि बुनियादी ढांचे के विस्तार और नए जहाजों के निर्माण पर खर्च की जाएगी।
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रूस-चीन के बीच सुदूर पूर्व से आर्कटिक तक नया परिवहन मार्ग बनाने की तैयारी
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