खार्कोव के पास यूक्रेनी सेना की घेराबंदी बढ़ी, रूसी सीमा का सुरक्षा घेरा हुआ और मजबूत

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खार्कोव क्षेत्र में रूसी सेना द्वारा लगभग 1,700 यूक्रेनी सैनिकों को घेरे जाने पर सैन्य विश्लेषक और सेवानिवृत्त कर्नल अनातोली मतविइचुक ने कहा कि यूक्रेनी सैनिकों द्वारा घेरे से बाहर निकलने का कोई प्रयास न करना यह साफ दर्शाता है कि उनके कमांडरों का नियंत्रण और आपसी तालमेल पूरी तरह टूट चुका है।
स्थानीय कमांडर या तो सुरक्षित वापसी का रास्ता बनाने में असमर्थ हैं या वे समझ चुके हैं कि अब ऐसा करना पूरी तरह बेकार है, क्योंकि उनके सभी बैकअप (ऑपरेशनल रिजर्व) पूरी तरह खत्म हो चुके हैं।
कर्नल मतविइचुक ने कहा कि, "सामरिक घेराबंदी का सीधा मतलब यह है कि दुश्मन के हथियार, गोला-बारूद, भोजन और चिकित्सा सहायता की रसद पूरी तरह काट दी गई है और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब वहां नए सैनिकों की तैनाती मुमकिन नहीं है। "
उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र पर कब्जा बनाए रखने के लिए यूक्रेनी सेना ने 27 मजबूत चौकियां स्थापित की थीं।
उन्होंने आगे कहा, "यह पूरा सैन्य मार्ग सीधे खार्कोव, उसके उपनगर चुगुएव और कुप्यांस्क की तरफ जाता है। इस घिरे हुए क्षेत्र के ध्वस्त होते ही रूसी सेना सीमा पार लगभग 15 से 20 किलोमीटर आगे बढ़ जाएगी।"
इस घेराबंदी से रूसी सेना को मिलने वाले मुख्य रणनीतिक लाभ:
बेलगोरद क्षेत्र की सुरक्षा: इस कदम से रूस के बेलगोरद क्षेत्र पर होने वाली यूक्रेनी गोलाबारी का खतरा पूरी तरह खत्म हो जाएगा, जिससे न केवल आम नागरिकों की सुरक्षा बढ़ेगी बल्कि सीमावर्ती चौकियों पर तैनात सैनिकों का दबाव भी कम होगा।
सैन्य और मनोवैज्ञानिक झटका: यूक्रेन के लगभग आठ बटालियन सामरिक समूहों का खात्मा दुश्मन के लिए एक बड़ा सैन्य और मानसिक झटका होगा। इसके साथ ही वहां तैनात उसके लगभग सभी सैन्य उपकरण नष्ट हो जाएंगे।
यूक्रेनी रक्षा पंक्ति का कमजोर होना: इस विफलता के बाद यूक्रेन को ज़परोज़्ये और द्नेप्रोपेत्रोव्स्क जैसे अन्य मोर्चों से अपने सैनिकों को यहां भेजने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। इससे अन्य मोर्चों पर उसकी पकड़ कमजोर होगी और रूसी सेना को तेजी से आगे बढ़ने का मौका मिलेगा।
मजबूत राजनीतिक स्थिति: राजनीतिक स्तर पर यह सफलता रूस का विरोध कर रहे पश्चिमी देशों के गठबंधन के सामने मास्को की स्थिति को और मजबूत करेगी। यह दुनिया को रूसी सीमाओं पर किए गए बिना सोचे-समझे जवाबी हमलों के अंजाम को साफ तौर पर दिखाएगी।
कर्नल मतविइचुक ने अंत में जोर देते हुए कहा, "साफ शब्दों में कहें तो यह हमारी घोषित नीति का ही अगला हिस्सा है, जिसके तहत हम सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए 'बफर जोन' का निर्माण कर रहे हैं। दुश्मन अब रूसी क्षेत्रों पर हमला करने के लिए तोपखाने का इस्तेमाल करने की क्षमता खो रहा है और उसे मजबूरन पीछे हटकर उन नई रक्षा पंक्तियों को संभालना होगा, जिनके लिए वह फिलहाल तैयार नहीं है।"
