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1,000 किमी तक मार करने वाला KAL ड्रोन कैसे बढ़ाएगा भारत की ताकत?
1,000 किमी तक मार करने वाला KAL ड्रोन कैसे बढ़ाएगा भारत की ताकत?
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भारत के स्वदेशी आत्मघाती ड्रोन KAL का राजस्थान की पोखरण रेंज में सफल परीक्षण किया गया। नोएडा स्थित निजी कंपनी के अनुसार वाहन से लॉन्च किए जाने वाले इस ड्रोन की... 21.09.2026, Sputnik भारत
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KAL को आत्मघाती या कामिकाज़े ड्रोन के रूप में विकसित किया गया है, जिसे किसी निर्धारित लक्ष्य पर हमला करने के लिए लॉन्च किया जा सकता है। यह ड्रोन सात से आठ घंटे तक उड़ान भर सकता है और 50 किलोग्राम तक विस्फोटक लेकर 5,000 मीटर की ऊंचाई तक पहुंच सकता है।ड्रोन आधुनिक मार्गदर्शन उपकरणों से लैस है और लक्ष्य की ओर सटीक दिशा में उड़ान भर सकता है। कंपनी के अनुसार इसका इस्तेमाल दुश्मन के रडार केंद्रों, वायु रक्षा प्रणालियों समेत अन्य महत्वपूर्ण ठिकानों पर हमला करने के लिए किया जा सकता है। वाहन से लॉन्च किए जाने की क्षमता दूरदराज के इलाकों में भी इसकी तैनाती को संभव बनाती है।भारत ने पिछले कुछ वर्षों में ड्रोन युद्धकला से जुड़ी अपनी क्षमताओं को तेजी से विकसित किया है। सरकारी कंपनियों के अलावा कई निजी कंपनियां भी अलग-अलग कार्यों के लिए ड्रोन तैयार कर रही हैं।भारतीय थल सेना, नौसेना और वायु सेना निगरानी, चौकसी और रसद पहुंचाने समेत विभिन्न कार्यों में ड्रोन का इस्तेमाल कर रही हैं। भारतीय सेना ने पैदल सेना की प्रत्येक बटालियन में ड्रोन युद्धकला में प्रशिक्षित सैनिकों की एक प्लाटून बनाने का काम लगभग पूरा कर लिया है।भारतीय सेना की आर्टिलरी कामिकाज़े ड्रोन की एक अलग रेजिमेंट तैयार कर रही है। इसी तरह प्रत्येक टैंक रेजिमेंट में लड़ाकू ड्रोन की अलग स्क्वाड्रन भी बनाई जा रही है।
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1,000 किमी तक मार करने वाला KAL ड्रोन कैसे बढ़ाएगा भारत की ताकत?
भारत के स्वदेशी आत्मघाती ड्रोन KAL का राजस्थान की पोखरण रेंज में सफल परीक्षण किया गया। नोएडा स्थित निजी कंपनी के अनुसार वाहन से लॉन्च किए जाने वाले इस ड्रोन की मारक क्षमता 1,000 किलोमीटर तक है। परीक्षण के दौरान ड्रोन के एयरफ्रेम, प्रोपल्शन, एवियोनिक्स और नेविगेशन समेत विभिन्न प्रणालियों को परखा गया।
KAL को आत्मघाती या कामिकाज़े ड्रोन के रूप में विकसित किया गया है, जिसे किसी निर्धारित लक्ष्य पर हमला करने के लिए लॉन्च किया जा सकता है। यह ड्रोन सात से आठ घंटे तक उड़ान भर सकता है और 50 किलोग्राम तक विस्फोटक लेकर 5,000 मीटर की ऊंचाई तक पहुंच सकता है।
ड्रोन आधुनिक मार्गदर्शन उपकरणों से लैस है और लक्ष्य की ओर सटीक दिशा में उड़ान भर सकता है। कंपनी के अनुसार इसका इस्तेमाल दुश्मन के रडार केंद्रों, वायु रक्षा प्रणालियों समेत अन्य महत्वपूर्ण ठिकानों पर हमला करने के लिए किया जा सकता है। वाहन से लॉन्च किए जाने की क्षमता दूरदराज के इलाकों में भी इसकी तैनाती को संभव बनाती है।
भारत ने पिछले कुछ वर्षों में ड्रोन युद्धकला से जुड़ी अपनी क्षमताओं को तेजी से विकसित किया है। सरकारी कंपनियों के अलावा कई निजी कंपनियां भी अलग-अलग कार्यों के लिए ड्रोन तैयार कर रही हैं।
भारतीय थल सेना, नौसेना और वायु सेना निगरानी, चौकसी और रसद पहुंचाने समेत विभिन्न कार्यों में ड्रोन का इस्तेमाल कर रही हैं। भारतीय सेना ने पैदल सेना की प्रत्येक बटालियन में ड्रोन युद्धकला में प्रशिक्षित सैनिकों की एक प्लाटून बनाने का काम लगभग पूरा कर लिया है।
भारतीय सेना की आर्टिलरी कामिकाज़े ड्रोन की एक अलग रेजिमेंट तैयार कर रही है। इसी तरह प्रत्येक टैंक रेजिमेंट में लड़ाकू ड्रोन की अलग स्क्वाड्रन भी बनाई जा रही है।