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नेपाल के प्रधानमंत्री ने UNGA में भीषण बाढ़ के बाद मदद के लिए भारत, चीन का आभार जताया
नेपाल के प्रधानमंत्री ने UNGA में भीषण बाढ़ के बाद मदद के लिए भारत, चीन का आभार जताया
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नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र में अपने पहले भाषण में बाढ़ के बाद नेपाल की मदद के लिए आगे आए भारत, चीन सहित सभी देशों का आभार जताया।
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प्रधानमंत्री शाह ने आगे अपने वक्तव्य में संयुक्त राष्ट्र को बताया कि नेपाल के सामने अब पुनर्बहाली और पुनर्निर्माण का बड़ा काम है।इसके अलावा उन्होंने इस भयानक बाढ़ के बाद भारत और चीन के साथ मिलकर हिमालयी जलवायु सहनशीलता तंत्र बनाने की अपील की। तीनों देशों के बीच डेटा और विशेषज्ञता साझा करने की योजना पेश करते हुए शाह ने दुनिया के नेताओं से कहा कि गर्म होती जलवायु हिमालय की नाजुक पारिस्थितिकी को अस्थिर कर रही है। 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के ढहने से भीषण बाढ़ आ गई, जिसकी वजह से उत्तरी और मध्य नेपाल के कई शहर और गांव तबाह हो गए।23 सितंबर की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस बाढ़ से मरने वालों की संख्या 1,452 हो गई थी और 4,700 से ज्यादा लोग लापता थे।
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नेपाल के प्रधानमंत्री ने UNGA में भीषण बाढ़ के बाद मदद के लिए भारत, चीन का आभार जताया
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र में अपने पहले भाषण में बाढ़ के बाद नेपाल की मदद के लिए आगे आए भारत, चीन सहित सभी देशों का आभार जताया।
उन्होंने कहा, "हमारे करीबी पड़ोसी, भारत और चीन ने तुरंत और दिल खोलकर मदद की। दूसरे दोस्त देश, संयुक्त राष्ट्र, मानवीय एजेंसियां, समाज सेवा करने वाली संस्थाएं और दुनिया भर के लोग नेपाल के साथ खड़े थे।"
प्रधानमंत्री शाह ने आगे अपने वक्तव्य में संयुक्त राष्ट्र को बताया कि नेपाल के सामने अब पुनर्बहाली और पुनर्निर्माण का बड़ा काम है।
उन्होंने कहा, "बाढ़ से सड़कें, पुल, स्कूल, घर, खेत और लोगों की आजीविका बर्बाद हो गई है। इससे स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचा है, जिसकी हमें अपने भविष्य के लिए ज़रूरत है। और इससे एक गरीब देश को उस नुकसान की भरपाई के लिए कर्ज लेने पर मजबूर होना पड़ता है, जो उसने खुद नहीं किया है।"
इसके अलावा उन्होंने इस भयानक बाढ़ के बाद भारत और चीन के साथ मिलकर हिमालयी जलवायु सहनशीलता तंत्र बनाने की अपील की। तीनों देशों के बीच डेटा और विशेषज्ञता साझा करने की योजना पेश करते हुए शाह ने दुनिया के नेताओं से कहा कि गर्म होती जलवायु हिमालय की नाजुक पारिस्थितिकी को अस्थिर कर रही है।
26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के ढहने से भीषण बाढ़ आ गई, जिसकी वजह से उत्तरी और मध्य नेपाल के कई शहर और गांव तबाह हो गए।
23 सितंबर की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस बाढ़ से मरने वालों की संख्या 1,452 हो गई थी और 4,700 से ज्यादा लोग लापता थे।