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पांचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के आयात का विकल्प खुला: वायुसेना प्रमुख
पांचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के आयात का विकल्प खुला: वायुसेना प्रमुख
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भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा है कि भारत को पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की विदेश से खरीद के विकल्प पर विचार करने की आवश्यकता होगी।... 03.10.2026, Sputnik भारत
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रूसी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान सुखोई-57 की खरीद की संभावनाओं पर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में वायुसेना प्रमुख ने कहा कि जब तक स्वदेशी लड़ाकू विमान तैयार नहीं हो जाता, तब तक के लिए भारत विदेशों से पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की खरीद के विकल्प देखेगा।भारत और रूस ने दो दशक पहले साथ मिलकर पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान के विकास और उत्पादन पर काम शुरू किया था, लेकिन बाद में यह कार्यक्रम टल गया।एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा कि भारत ने अंतरिक्ष में उपग्रह भेजकर सूचना और चौकसी का कार्य शुरू किया है। साथ ही वह अंतरिक्ष में सैन्य कार्रवाइयों की भी तैयारी कर रहा है।लड़ाकू विमानों और मानवरहित विमानों के साथ मिलकर कार्रवाई करने यानी मैन्ड-अनमैन्ड टीमिंग की प्रगति के बारे में उन्होंने कहा कि कार्यक्रम तय दिशा में आगे बढ़ रहा है, परीक्षण किए जा रहे हैं और कुछ वर्षों में ही यह तैयार हो जाएगा। हालांकि उन्होंने वायुसेना में ड्रोन युद्धकला के लिए अलग से कार्यदल बनाने की आवश्यकता को नकार दिया।वायुसेना प्रमुख ने हवा से हवा में मार करने वाली लंबी दूरी की मिसाइलों के कार्यक्रम पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि अस्त्र के उन्नत संस्करण और आयातित मिसाइलों के जरिए इस क्षमता को पर्याप्त बनाया जाएगा।
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पांचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के आयात का विकल्प खुला: वायुसेना प्रमुख
भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा है कि भारत को पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की विदेश से खरीद के विकल्प पर विचार करने की आवश्यकता होगी। वह भारतीय वायुसेना की 94वीं वर्षगांठ से पहले पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे।
रूसी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान सुखोई-57 की खरीद की संभावनाओं पर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में वायुसेना प्रमुख ने कहा कि जब तक स्वदेशी लड़ाकू विमान तैयार नहीं हो जाता, तब तक के लिए भारत विदेशों से पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की खरीद के विकल्प देखेगा।
उन्होंने कहा, "अगर हमारे प्रतिद्वंद्वियों के पास पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान है तो हमारे पास भी होना चाहिए, लेकिन अभी तक इस बारे में कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।"
भारत और रूस ने दो दशक पहले साथ मिलकर पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान के विकास और उत्पादन पर काम शुरू किया था, लेकिन बाद में यह कार्यक्रम टल गया।
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा कि भारत ने अंतरिक्ष में उपग्रह भेजकर सूचना और चौकसी का कार्य शुरू किया है। साथ ही वह अंतरिक्ष में सैन्य कार्रवाइयों की भी तैयारी कर रहा है।
लड़ाकू विमानों और मानवरहित विमानों के साथ मिलकर कार्रवाई करने यानी मैन्ड-अनमैन्ड टीमिंग की प्रगति के बारे में उन्होंने कहा कि कार्यक्रम तय दिशा में आगे बढ़ रहा है, परीक्षण किए जा रहे हैं और कुछ वर्षों में ही यह तैयार हो जाएगा। हालांकि उन्होंने वायुसेना में ड्रोन युद्धकला के लिए अलग से कार्यदल बनाने की आवश्यकता को नकार दिया।
वायुसेना प्रमुख ने हवा से हवा में मार करने वाली लंबी दूरी की मिसाइलों के कार्यक्रम पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि अस्त्र के उन्नत संस्करण और आयातित मिसाइलों के जरिए इस क्षमता को पर्याप्त बनाया जाएगा।