भारत-रूस संबंध
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भारत की सुरक्षा पर खतरे के समय रूस उसके साथ खड़ा रहा: जयशंकर

© Photo : X/@DrSJaishankarIndian External Affairs Minister S. Jaishankar speaks at the Munich Leaders Meeting in New Delhi.
Indian External Affairs Minister S. Jaishankar speaks at the Munich Leaders Meeting in New Delhi. - Sputnik भारत, 1920, 04.10.2026
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भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि भारत और रूस के संबंधों का लंबा इतिहास रहा है और भारतीय सुरक्षा तथा क्षेत्रीय अखंडता के खतरे में पड़ने के समय रूस ने नई दिल्ली का साथ दिया था।
नई दिल्ली में आयोजित म्यूनिख लीडर्स मीटिंग के दौरान जयशंकर से भारत-रूस संबंधों के भविष्य को लेकर सवाल पूछा गया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच 1950 के दशक से मजबूत संबंध रहे हैं और भारत इस इतिहास को भूला नहीं है।
जयशंकर ने कहा, "हमारे लिए रूस और उससे पहले सोवियत संघ ऐसा देश था, जो कई मौकों पर हमारे साथ खड़ा रहा, जब हमारी सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता खतरे में थी।"
उन्होंने कहा कि उस दौर में दुनिया के कई देश भारत के पड़ोस में मौजूद एक सैन्य शासन का समर्थन कर रहे थे, जबकि रूस के साथ नई दिल्ली के संबंध मजबूत बने रहे। इसी सकारात्मक अनुभव ने भारत के मौजूदा दृष्टिकोण को भी आकार दिया है।

रक्षा से आगे बढ़े भारत-रूस संबंध

विदेश मंत्री ने बताया कि बदलते वैश्विक हालात के साथ भारत-रूस संबंधों का दायरा भी बढ़ा है। रक्षा सहयोग के साथ परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष, व्यापार, निवेश, ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधन अब इस साझेदारी के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।
उनके मुताबिक, प्रत्येक देश दूसरे देशों को अपने अनुभवों के आधार पर देखता है। रूस के साथ भारत का अनुभव लगातार सकारात्मक रहा है, इसलिए यूरोप और भारत का मॉस्को को लेकर दृष्टिकोण अलग होना स्वाभाविक है।

रूस और यूक्रेन दोनों से बातचीत कर रहा भारत

यूक्रेन संघर्ष पर जयशंकर ने कहा कि भारत इसका अंत चाहता है और मानता है कि समाधान के लिए संवाद, कूटनीति और बातचीत जरूरी है।
उन्होंने बताया कि नई दिल्ली रूस और यूक्रेन दोनों के संपर्क में है। इन वार्ताओं में काला सागर में जहाजों की सुरक्षा, अनाज और ऊर्जा निर्यात तथा एक-दूसरे के ठिकानों पर हमले न करने की संभावनाओं जैसे व्यावहारिक मुद्दे शामिल हैं।

BRICS के बढ़ते प्रभाव पर बोले जयशंकर

विदेश मंत्री ने भारत को केवल "मध्य शक्ति" की श्रेणी में रखे जाने पर भी सवाल उठाया। उन्होंने भारत को 7,000 वर्ष पुरानी सभ्यतागत शक्ति बताते हुए कहा कि दुनिया में बहुत कम देश इस कसौटी पर खरे उतरते हैं।
BRICS पर जयशंकर ने कहा कि बड़ी संख्या में देशों की इसमें शामिल होने की इच्छा इसके बढ़ते महत्व को दिखाती है। उनके मुताबिक, समूह ने अपनी सदस्य संख्या दोगुनी की है और बिना किसी कठिनाई के इसे चार गुना भी किया जा सकता था। अब BRICS के सामने अपनी बढ़ती वैश्विक भूमिका के अनुरूप एजेंडे को और व्यापक बनाने की चुनौती है।
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