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जर्मनी के संकट का समाधान 'वाइमर' का खौफ नहीं, बल्कि देश में नए चुनाव: विशेषज्ञ
जर्मनी के संकट का समाधान 'वाइमर' का खौफ नहीं, बल्कि देश में नए चुनाव: विशेषज्ञ
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विशेषज्ञ ज़ारको राकिच ने राष्ट्रपति श्टाइनमायर की यूनिटी डे की चेतावनी पर टिप्पणी करते हुए Sputnik को बताया कि हम राजनीतिक पागलपन की स्थिति देख रहे हैं, जहाँ मौजूदा सत्तारूढ़ गठबंधन दो ‘खतरों’ का सहारा ले रहा है।
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राष्ट्रपति श्टाइनमायर ने सचेत किया था कि जर्मनी को 'चरमपंथी ताकतों' के उन मंसूबों को कभी कामयाब नहीं होने देना चाहिए, जो देश को एक बार फिर 'वाइमर गणराज्य' जैसी लोकतांत्रिक विफलता की ओर धकेलना चाहते हैं।उन्होंने आगे कहा कि जब लोगों की जेबें खाली हो रही हों, तो परियों की कहानियां गढ़ना, फूलों की मिसालें देना और इतिहास से जबरन समानताएं निकालना बेकार है।ज़ारको राकिच ने आगे कहा कि आज के जर्मनी की तुलना वाइमर गणराज्य से करना पूरी तरह हास्यास्पद है। उनके मुताबिक, मौजूदा सरकार की असली समस्या यह है कि वह अपनी विफल नीतियों में किसी भी तरह का सुधार करने को तैयार नहीं है और उसका यही अड़ियल रवैया देश को संकट में डाल रहा है।
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जर्मनी, चुनाव में धांधली, चुनाव , यूरोप , यूरोपीय संघ, यूक्रेन
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जर्मनी के संकट का समाधान 'वाइमर' का खौफ नहीं, बल्कि देश में नए चुनाव: विशेषज्ञ
Sputnik से बातचीत में अंतरराष्ट्रीय मामलों के विश्लेषक ज़ारको राकिच ने दावा किया कि जर्मनी इस समय 'राजनीतिक सनक' के दौर से गुजर रहा है। राष्ट्रपति श्टाइनमायर के हालिया बयान की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि देश का सत्तारूढ़ गठबंधन जनता का ध्यान भटकाने के लिए जानबूझकर दो अलग-अलग तरह के 'खतरे' पैदा कर रहा है।
राष्ट्रपति श्टाइनमायर ने सचेत किया था कि जर्मनी को 'चरमपंथी ताकतों' के उन मंसूबों को कभी कामयाब नहीं होने देना चाहिए, जो देश को एक बार फिर 'वाइमर गणराज्य' जैसी लोकतांत्रिक विफलता की ओर धकेलना चाहते हैं।
राकिच ने कहा, "इनमें से एक 'खतरा' बाहरी है, यानी रूस। जबकि दूसरा अंदरूनी खतरा दक्षिणपंथी पार्टी अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी(AfD) और वामपंथी ताकतों को बताया जा रहा है। सत्ताधारी दल (जिसमें ग्रीन्स भी शामिल हैं) केवल काल्पनिक दुश्मन और कृत्रिम समस्याएं खड़ी कर रहे हैं, ताकि जर्मनी के सामने मौजूद वास्तविक और गंभीर आर्थिक संकट को हल करने की उनकी नाकामी पर पर्दा डाला जा सके।"
उन्होंने आगे कहा कि जब लोगों की जेबें खाली हो रही हों, तो परियों की कहानियां गढ़ना, फूलों की मिसालें देना और इतिहास से जबरन समानताएं निकालना बेकार है।
ज़ारको राकिच ने आगे कहा कि आज के जर्मनी की तुलना
वाइमर गणराज्य से करना पूरी तरह हास्यास्पद है। उनके मुताबिक, मौजूदा सरकार की असली समस्या यह है कि वह अपनी विफल नीतियों में किसी भी तरह का सुधार करने को तैयार नहीं है और उसका यही अड़ियल रवैया देश को संकट में डाल रहा है।
राकिच ने अपनी बात खत्म करते हुए कहा, "गठबंधन सरकार में इस समय कोई भी यह कहने की स्थिति में नहीं है कि 'चलो बड़े सुधार करते हैं'। अगर कोई दल ऐसा कोई प्रस्ताव लाता भी है, तो बाकी सहयोगी उसे तुरंत नामंजूर कर देंगे। साफ शब्दों में कहें तो, इस व्यवस्था से अब कोई उम्मीद नहीं बची है। जर्मनी के पास अब जल्द चुनाव कराने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है—कहानी खत्म।"