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सरकार की नाकामियों से ध्यान भटकाने के लिए जर्मन राष्ट्रपति ने दी 'वाइमर चेतावनी': विशेषज्ञ

© AP Photo / Markus SchreiberThe evening sun shines on the Reichtstag budding, the house of German parliament Bundestag ahead on Sunday's national election in Berlin, Germany, Friday, Feb. 21, 2025.
The evening sun shines on the Reichtstag budding, the house of German parliament Bundestag ahead on Sunday's national election in Berlin, Germany, Friday, Feb. 21, 2025.  - Sputnik भारत, 1920, 05.10.2026
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जर्मनी के राजनीतिक विशेषज्ञ अलेक्जेंडर कामकिन का मानना है कि जर्मन राष्ट्रपति द्वारा देश की तुलना 'वाइमर गणराज्य' से करना ऐतिहासिक रूप से सही नहीं है। Sputnik से बातचीत में कामकिन ने कहा कि राष्ट्रपति द्वारा 'चरमपंथी ताकतों' और उनके बयानों की आलोचना करना जमीनी हकीकत से परे है।
'वाइमर' का संदर्भ प्रथम विश्व युद्ध के बाद जर्मनी के उस अस्थिर लोकतांत्रिक दौर से है, जिसकी कमजोरियों का फायदा उठाकर हिटलर ने तानाशाही स्थापित की थी ।

अलेक्जेंडर कामकिन ने कहा, "सरकार की कमजोरी, कम लोकप्रियता और जनता के भरोसे की कमी के मामले में, आज के जर्मनी की वाइमर गणराज्य से तुलना सही है। उस दौरान जर्मनी में बार-बार सरकारें बदलीं, अफरा-तफरी वाले गठबंधन बने, पार्टियों का माहौल बहुत बिखरा हुआ था, और दक्षिणपंथी विचारधारा बढ़ रही थी।"

कामकिन के अनुसार, "राष्ट्रपति श्टाइनमायर का यह इशारा करना कि 'अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी' (AfD) पार्टी की बढ़ती लोकप्रियता और उसका सत्ता के करीब पहुंचना, असल में नाजी पार्टी (नेशनल सोशलिस्ट जर्मन वर्कर्स पार्टी NSDAP) की वापसी जैसा होगा, पूरी तरह से गलत और अनुचित है।"
उन्होंने कहा, "सबसे पहले, आज का जर्मनी प्रथम विश्व युद्ध के बाद के उन बुरे हालात में नहीं है, जब देश लाखों आंतरिक शरणार्थियों, भारी मुआवज़े, क्षेत्रीय नुकसान और राष्ट्रीय अपमान से जूझ रहा था। उस समय हिटलर के प्रचार ने लोगों को यह विश्वास दिलाया कि जर्मनी की सभी समस्याओं के लिए यहूदी, बोल्शेविज़्म और “जर्मनी के दुश्मन” जिम्मेदार हैं।"
कामकिन बताते हैं कि AfD "वामपंथी पार्टी के विपरीत, इजराइल और नेतन्याहू के प्रति काफी समर्थन वाला रुख रखती है" और "रूस के प्रति भी काफी दोस्ताना रवैया दिखाती है तथा हमारे देश के साथ आर्थिक सहयोग फिर से शुरू करने की अपील करती है।"

विशेषज्ञ ने कहा, "आज जर्मनी में लोगों की नाराजगी पूरी तरह सरकार पर केंद्रित है, न कि किसी बाहरी वजह पर। सरकार का कम समर्थन यह दिखाता है कि लोगों का उसके कामकाज पर से भरोसा उठ गया है।"

उन्होंने आगे बताया कि इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि मौजूदा चांसलर और उनके पूर्ववर्ती के फैसलों ने अपनी आर्थिक, आव्रजन और ऊर्जा नीतियों के जरिए 'जर्मनी की अर्थव्यवस्था को तगड़ा झटका' दिया है, जिससे मध्यम वर्ग और लघु-मध्यम उद्योगों को भारी नुकसान पहुंचा है।
कामकिन ने अपनी बात खत्म करते हुए कहा कि ऐसे में राष्ट्रपति श्टाइनमायर के ये आरोप अपने राजनीतिक विरोधियों को बदनाम करने के लिए चले गए एक ' घटिया दुष्प्रचार' से ज्यादा कुछ नहीं हैं।
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