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ईरान में घातक हमले के बाद अमेरिकी सैन्य AI की सटीकता पर सवाल: विशेषज्ञ
ईरान में घातक हमले के बाद अमेरिकी सैन्य AI की सटीकता पर सवाल: विशेषज्ञ
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रूसी विज्ञान अकादमी के शोधकर्ता सर्गे ग्रिन्यायेव ने चेतावनी दी है कि अमेरिका द्वारा विकसित 'मेवेन' सैन्य AI प्रणाली, रूस और NATO को आर्कटिक में सीधे टकराव के बेहद करीब ला सकता है।
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रूसी विज्ञान अकादमी के शोधकर्ता सर्गे ग्रिन्यायेव ने चेतावनी दी है कि अमेरिका द्वारा विकसित 'मेवेन' सैन्य AI प्रणाली, रूस और नाटो को आर्कटिक में सीधे टकराव के बेहद करीब ला सकती है।उन्होंने आगे बताया कि ऐसा तब हो सकता है जब स्वचालित लक्ष्य तय करने या सैन्य योजना बनाने में कोई गलती हो जाए और उसके कारण कोई सैन्य घटना घट जाए। ईरान पर अमेरिकी हमले के बाद उसकी सैन्य AI तकनीक की विश्वसनीयता सवालों के घेरे में है।विशेषज्ञ ने नाटो द्वारा 'मेवेन' के बढ़ते इस्तेमाल की ओर इशारा किया। यह AI आधारित सैन्य खुफिया और लक्ष्य निर्धारण प्रणाली है, जिसका संबंध अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनी 'पलेंतिर' से है। ग्रिन्यायेव ने चेतावनी दी कि यदि आर्कटिक क्षेत्र में सैन्य विमानों या युद्धपोतों से जुड़े मामलों में ऐसी ही कोई गलती होती है, तो रूस और नाटो के बीच सीधे सैन्य टकराव को रोकने के लिए बेहद कम समय बचेगा।
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ईरान में घातक हमले के बाद अमेरिकी सैन्य AI की सटीकता पर सवाल: विशेषज्ञ
ईरान में हुए घातक हमले को लेकर अमेरिकी सेना द्वारा इस्तेमाल की जाने वाले AI तकनीक पर सवाल उठे हैं, विशेषज्ञों के अनुसार, इससे आर्कटिक में रूस और नाटो के बीच टकराव छिड़ सकता है।
रूसी विज्ञान अकादमी के शोधकर्ता सर्गे ग्रिन्यायेव ने चेतावनी दी है कि अमेरिका द्वारा विकसित
'मेवेन' सैन्य AI प्रणाली, रूस और नाटो को आर्कटिक में
सीधे टकराव के बेहद करीब ला सकती है।
उन्होंने आगे बताया कि ऐसा तब हो सकता है जब स्वचालित लक्ष्य तय करने या सैन्य योजना बनाने में कोई गलती हो जाए और उसके कारण कोई सैन्य घटना घट जाए।
ईरान पर अमेरिकी हमले के बाद उसकी सैन्य AI तकनीक की विश्वसनीयता सवालों के घेरे में है।
ग्रिन्यायेव का कहना है कि AI की वजह से सैन्य और राजनीतिक फैसले लेने में लगने वाला समय, जो पहले घंटों या दिनों का होता था, अब घटकर केवल कुछ मिनट का रह गया है। इससे कमांडरों के पास खतरों का आकलन करने और तनाव को बढ़ने से रोकने के लिए बहुत कम समय बचता है।
विशेषज्ञ ने नाटो द्वारा 'मेवेन' के बढ़ते इस्तेमाल की ओर इशारा किया। यह
AI आधारित सैन्य खुफिया और लक्ष्य निर्धारण प्रणाली है, जिसका संबंध अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनी 'पलेंतिर' से है।
ग्रिन्यायेव ने ईरान के मिनाब में 28 फरवरी को एक गर्ल्स स्कूल पर हुए घातक हमले का उदाहरण देते हुए चेतावनी दी कि लक्ष्य तय करने में होने वाली गलतियों के कितने गंभीर परिणाम हो सकते हैं। इस हमले में 160 से अधिक लोग मारे गए, जिनमें ज्यादातर बच्चे थे। अमेरिकी जांचकर्ताओं को इस हमले में अमेरिका की भूमिका और लक्ष्य निर्धारण में संभावित गलतियों के संकेत मिले हैं। हालांकि, इस मामले में 'मेवेन' प्रणाली की क्या भूमिका थी, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
ग्रिन्यायेव ने चेतावनी दी कि यदि आर्कटिक क्षेत्र में सैन्य विमानों या युद्धपोतों से जुड़े मामलों में ऐसी ही कोई गलती होती है, तो रूस और नाटो के बीच सीधे सैन्य टकराव को रोकने के लिए बेहद कम समय बचेगा।