https://hindi.sputniknews.in/20261102/iiriaan-mdhysthon-ke-jriie-ameriikaa-ke-saath-shaanti-smjhaute-pri-baatchiit-kri-rihaa-hai-videsh-mntrii-ariaaghchii-12772005.html
ईरान मध्यस्थों के जरिए अमेरिका के साथ शांति समझौते पर बातचीत कर रहा है: विदेश मंत्री अराघची
ईरान मध्यस्थों के जरिए अमेरिका के साथ शांति समझौते पर बातचीत कर रहा है: विदेश मंत्री अराघची
Sputnik भारत
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोमवार को कहा कि उनका देश मध्यस्थों के जरिए अमेरिका के साथ शांति समझौते पर बातचीत कर रहा है। हालांकि, इसका नतीजा अमेरिका... 02.11.2026, Sputnik भारत
2026-11-02T22:37+0530
2026-11-02T22:37+0530
2026-11-02T22:37+0530
राजनीति
ईरान
अमेरिका-इजराइल-ईरान युद्ध
अमेरिका
मध्य पूर्व
शांति संधि
https://cdn1.img.sputniknews.in/img/07ea/06/1c/11436319_0:72:3072:1800_1920x0_80_0_0_78be67753237f420e4b7cf98f86829bb.jpg
उन्होंने कहा कि तेहरान मौजूदा संघर्ष के सैन्य जवाब और कूटनीतिक समाधान, दोनों के लिए तैयार है। अराघची ने यह भी कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने के लिए ईरान की शर्तें स्पष्ट हैं। उनके मुताबिक, यदि इन शर्तों को पूरा किया जाता है, तो समुद्री मार्ग फिर से खोल दिया जाएगा और बातचीत दोबारा शुरू हो जाएगी। ऐसा नहीं होने पर मौजूदा स्थिति बनी रहेगी और ईरान कोई रियायत नहीं देगा।28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान में कई ठिकानों पर हमले शुरू किए थे, जिसके जवाब में इस्लामिक गणराज्य ईरान ने भी कार्रवाई की। जून के मध्य में तेहरान और वॉशिंगटन ने संघर्ष समाप्त करने के उद्देश्य से एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे। हालांकि, कुछ ही समय बाद दोनों पक्षों के बीच फिर से हमले शुरू हो गए। फिलहाल संघर्ष का कोई समाधान नहीं निकल पाया है।ईरान के आसपास बढ़ते तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री आवाजाही लगभग ठप हो गई है। यह फारस की खाड़ी के देशों से वैश्विक बाजारों तक तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस पहुंचाने का एक प्रमुख समुद्री मार्ग है। इस स्थिति ने क्षेत्र में तेल के उत्पादन और निर्यात को भी प्रभावित किया है, जिससे वैश्विक बाजार में कीमतें बढ़ गई हैं।
https://hindi.sputniknews.in/20261031/iiriaan-ke-srivochch-netaa-ne-dushmn-kii-kisii-bhii-aakraamktaa-kaa-hri-trih-se-jvaab-dene-kaa-snklp-liyaa-hai-12754931.html
ईरान
अमेरिका
मध्य पूर्व
Sputnik भारत
feedback.hindi@sputniknews.com
+74956456601
MIA „Rossiya Segodnya“
2026
Sputnik भारत
feedback.hindi@sputniknews.com
+74956456601
MIA „Rossiya Segodnya“
खबरें
hi_IN
Sputnik भारत
feedback.hindi@sputniknews.com
+74956456601
MIA „Rossiya Segodnya“
https://cdn1.img.sputniknews.in/img/07ea/06/1c/11436319_171:0:2902:2048_1920x0_80_0_0_f1a4761e081011f9718465156c1f09ab.jpgSputnik भारत
feedback.hindi@sputniknews.com
+74956456601
MIA „Rossiya Segodnya“
ईरान, अमेरिका-इजराइल-ईरान युद्ध, अमेरिका, मध्य पूर्व, शांति संधि
ईरान, अमेरिका-इजराइल-ईरान युद्ध, अमेरिका, मध्य पूर्व, शांति संधि
ईरान मध्यस्थों के जरिए अमेरिका के साथ शांति समझौते पर बातचीत कर रहा है: विदेश मंत्री अराघची
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोमवार को कहा कि उनका देश मध्यस्थों के जरिए अमेरिका के साथ शांति समझौते पर बातचीत कर रहा है। हालांकि, इसका नतीजा अमेरिका के राजनीतिक फैसले पर निर्भर करेगा।
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के मुताबिक, अराघची ने कहा, "मध्यस्थों के जरिए अमेरिका के साथ बातचीत काफी गहन स्तर पर चल रही है। हमने अपनी शर्तें और प्रस्ताव सामने रख दिए हैं। अब सब कुछ अमेरिका के राजनीतिक फैसले पर निर्भर करता है।"
उन्होंने कहा कि तेहरान मौजूदा संघर्ष के सैन्य जवाब और कूटनीतिक समाधान, दोनों के लिए तैयार है। अराघची ने यह भी कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने के लिए
ईरान की शर्तें स्पष्ट हैं। उनके मुताबिक, यदि इन शर्तों को पूरा किया जाता है, तो समुद्री मार्ग फिर से खोल दिया जाएगा और बातचीत दोबारा शुरू हो जाएगी। ऐसा नहीं होने पर मौजूदा स्थिति बनी रहेगी और ईरान कोई रियायत नहीं देगा।
28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान में कई ठिकानों पर हमले शुरू किए थे, जिसके जवाब में इस्लामिक गणराज्य ईरान ने भी कार्रवाई की। जून के मध्य में तेहरान और वॉशिंगटन ने संघर्ष समाप्त करने के उद्देश्य से एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे। हालांकि, कुछ ही समय बाद दोनों पक्षों के बीच फिर से हमले शुरू हो गए। फिलहाल संघर्ष का कोई समाधान नहीं निकल पाया है।
ईरान के आसपास बढ़ते तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री आवाजाही लगभग ठप हो गई है। यह फारस की खाड़ी के देशों से वैश्विक बाजारों तक तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस पहुंचाने का एक प्रमुख समुद्री मार्ग है। इस स्थिति ने क्षेत्र में तेल के उत्पादन और निर्यात को भी प्रभावित किया है, जिससे वैश्विक बाजार में कीमतें बढ़ गई हैं।