यूक्रेन संकट
मास्को ने डोनबास के लोगों को, खास तौर पर रूसी बोलनेवाली आबादी को, कीव के नित्य हमलों से बचाने के लिए फरवरी 2022 को विशेष सैन्य अभियान शुरू किया था।

जर्मन अधिकारियों के बीच बातचीत की रिकॉर्डिंग लीक होने से नाटो सदस्यों के बीच दरार

German Chancellor Olaf Scholz stands next to a NATO flag after a speech as part of a visit at the Julius-Leber-Baracks in Berlin, Germany, Tuesday, Feb. 28, 2023.
जर्मन अधिकारियों के बीच आपसी बातचीत की लीक रिकॉर्डिंग ने नाटो सदस्यों के बीच "विभाजन पैदा कर दिया" और प्रमुख हथियार प्राप्त करने के यूक्रेन के प्रयासों में भी बाधा उत्पन्न की, अमेरिकी अखबार पोलिटिको ने बताया।
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लेख में कहा गया कि पिछले कुछ दिनों में मास्को अपने दुश्मनों के बीच विभाजन पैदा करने, जर्मन चांसलर को बदनाम करने और प्रमुख हथियारों को हासिल करने के यूक्रेन के प्रयास को विफल करने में कामयाब रहा है।

पोलिटिको ने लिखा, "रिकॉर्डिंग जर्मनी सेना की संस्थागत हताशा और क्रूज़ मिसाइलों को यूक्रेन को भेजने पर चांसलर की हठधर्मिता पर उसकी घबराहट को उजागर करती है। दुर्भाग्य से इस बातचीत के जारी होने के बाद कीव को मिसाइलें मिलने की संभावना और भी कम हो गई हैं।"

अन्य राजनेता जो इस से असहमत हैं, वे स्थिति पर गौर करने के बारे में सोच रहे हैं और पूछ रहे हैं कि स्कोल्ज़ ने मिसाइलें न भेजने का फैसला क्यों किया। इस जांच में लंबा समय लग सकता है और इससे यूक्रेन को मदद नहीं मिल सकेगी.
बता दें कि पिछले हफ्ते जर्मन सैन्य अधिकारियों की गोपनीय बातचीत से जुड़ी एक रिकॉर्डिंग रूस के पास पहुंची थी। जिसमें उन्होंने यूक्रेन को टॉरस मिसाइलों की संभावित आपूर्ति और रूस के क्रीमिया पुल पर हमले की चर्चा की।
German Bundeswehr soldiers of the NATO enhanced forward presence battalion in front of the Germany army Main battle tank Leopard 2A6 at the Training Range in Pabrade, Lithuania, in May 2023.
यूक्रेन संकट
टॉरस मिसाइलों को यूक्रेन में स्थानांतरित करना जर्मनी को रूस-यूक्रेन संघर्ष की चपेट में ले लेगा
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