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ट्रम्प की वापसी: भारत-रूस साझेदारी के लिए चुनौतियां और नई संभावनाएं

अमेरिकी चुनाव में जीत हासिल करने के बाद डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार को एक बार फिर व्हाइट हाउस की कमान थाम ली। उन्होंने 47 वें राष्ट्रपति के तौर पर पद संभालने के बाद अपने पहले भाषण में अवैध अप्रवासन, विदेश नीति, पेरिस जलवायु समझौता और देश में दो जेन्डर जैसे कई अन्य मुद्दों को उठाया।
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राष्ट्रपति ट्रम्प ने सोमवार को अपने दूसरे कार्यकाल के पहले दिन ही कई कार्यकारी आदेशों पर हस्ताक्षर किए, जिनमें उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ब्रिक्स देश पारस्परिक आधार पर अमेरिका के साथ व्यापार संतुलन नहीं बनाते हैं, तो वे भारत सहित ब्रिक्स देशों पर 100% टैरिफ लगाएंगे।

डोनाल्ड ट्रंप ने संवाददाताओं से कहा, "ब्रिक्स छह, सात देश हैं...हम पर कुछ करने की कोशिश कर रहे हैं...अगर वे ऐसा करते हैं तो यह उनके लिए अच्छा नहीं होगा।" उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, "हम अपने नागरिकों को समृद्ध बनाने के लिए विदेशी देशों पर टैरिफ और कर लगाएंगे।"

भारत और रूस ने ब्रिक्स, एससीओ और भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी जैसे मंचों के माध्यम से सहयोग पर जोर दिया है जिससे व्यापार, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और बुनियादी ढांचे के विकास को बढ़ावा मिला। पश्चिमी दवाब का सामना और अधिक समावेशी वैश्विक व्यवस्था की वकालत करके, भारत और रूस ने स्वयं को ग्लोबल साउथ की आर्थिक और विकासात्मक आवश्यकताओं को पूरा करने में प्रमुख सहयोगी के रूप में स्थापित किया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति के सत्ता में वापसी करने के बाद भारत और रूस द्वारा भविष्य को लेकर किए जाने वाले निर्णयों को लेकर Sputnik India ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज, सेंटर फॉर रशियन एंड सेंट्रल एशियन स्टडीज के एसोसिएट प्रोफेसर अमिताभ सिंह से बात की।
प्रोफेसर ने बताया कि ट्रंप ने रक्षा और व्यापार को प्राथमिकता दी हैं, "वह चाहते थे कि भारत अमेरिका से अधिक हथियार खरीदे और रूस से खरीद कम करे।"

अमिताभ सिंह ने बताया, "रूस भारत के लिए एक विश्वसनीय रक्षा भागीदार बना हुआ है। अल्पावधि में, भारत-रूस संबंध नहीं बदलेंगे।"

एसोसिएट प्रोफेसर सिंह कहते हैं कि ट्रंप के कार्यकाल के दौरान "इंडो-पैसिफिक" शब्द लोकप्रिय हुआ, "यह एशिया और दक्षिण एशिया पर ध्यान केंद्रित करने के लिए पहले के अमेरिकी प्रयासों पर आधारित है।"
उन्होंने जोर देकर कहा, "ट्रम्प संभवतः एशिया पर ध्यान देने के पहले के अमेरिकी प्रयासों की इस रणनीति को जारी रखेंगे, लेकिन इसे आर्थिक सौदों से जोड़ेंगे। भारत के लिए, रूस और अमेरिका के साथ अपने संबंधों को संतुलित करना महत्वपूर्ण होगा। भारत क्षेत्र में सुरक्षा चिंताओं को दूर करते हुए अपनी बहु-संरेखण नीति को बनाए रखेगा।"
ट्रम्प की वैश्विक नीतियों को संतुलित करने के लिए भारत और रूस द्वारा ब्रिक्स और एससीओ जैसे बहुपक्षीय प्लेटफार्मों का लाभ उठाने पर प्रोफेसर कहते हैं कि भारत ब्रिक्स का एक सक्रिय सदस्य है। उनके अनुसार, रूस के लिए भी ब्रिक्स महत्वपूर्ण है, और यह मंच दोनों देशों को वैश्विक स्तर पर अपना प्रभाव बढ़ाने की अनुमति देता है।

भारत-रूसी मामलों के जानकार ने कहा, "ट्रम्प के अनुसार अमेरिका-रूस संबंधों में सुधार की संभावना नहीं है। वर्तमान प्रतिबंधों ने पहले से ही उनके संबंधों को तनावपूर्ण बना दिया है। भारत रूस से अपने तेल आयात को लेकर भी चिंतित है। यदि रूसी तेल पर शिपिंग प्रतिबंध बढ़ते हैं, तो यह भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं को नुकसान पहुँचा सकता है।"

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