IRRPL के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक मेजर जनरल एस के शर्मा ने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि अगले वर्ष तक IRRPL में हर 100 सेकंड में एक राइफल बनाई जाएगी।
उत्पादन प्रारंभ करने के बाद 18 महीने में IRRPL ने भारतीय सेना को 47516 AK-203 राइफलें दे दी हैं। इस वर्ष के अंत तक कुल 70000 राइफलें भारतीय सेना को सौंप दी जाएंगी। अगले वर्ष से हर महीने 12000 और पूरे वर्ष में 1.5 लाख राइफलें बनाई जाएंगी।
जनरल शर्मा ने कहा कि उन्होंने इन राइफलों का प्रयोग करने वाले सैनिकों और सैनिक कमांडरों से कई बार बात की ताकि उनकी प्रतिक्रिया मिल सके और सभी इस हथियार से पूरी तरह से संतुष्ट हैं।
IRRPL को वर्ष 2032 तक भारतीय सेना को 601427 AK-203 की आपूर्ति करनी है लेकिन संभावना है कि यह ऑर्डर 2030 तक यानी 22 महीने पहले ही पूरा कर लिया जाए।
जनरल शर्मा ने बताया कि भारत की आवश्यकता पूरी करने के साथ-साथ AK-203 के निर्यात की तैयारी चल रही है और बहुत जल्द पहले आयातक पर फैसला कर लिया जाएगा। भारत और रूस ने 2021 में रूस से तकनीक स्थानांतरण से भारत में AK-203 बनाने का समझौता किया था।
15 अगस्त 2023 को भारत में बनी पहली AK-203 फैक्टरी से बाहर आई। कलाश्निकोव राइफलें भारतीय सैनिकों के बीच एक भरोसेमंद हथियार के तौर पर प्रसिद्ध हैं और भारत कई दशकों से इस तरह की राइफलें प्रयोग कर रहा है। अब भारतीय सेना अपने मुख्य शस्त्र के रूप में AK-203 को शामिल कर रही है।