भारतीय वायुसेना के सुखोई-30, मिग-29, तेजस, रफाल, जेगुआर और मिराज-2000 लड़ाकू विमान इस अभ्यास में शत्रु के ठिकानों पर हवाई हमला करते हुए दिखाई देंगे। MI-17, चिनूक जैसे भारी परिवहन हेलीकॉप्टरों के साथ-साथ स्वदेशी ALH ध्रुव और प्रचंड भी अभ्यास में अपनी भूमिका निभाएंगे।
रक्षा से जुड़े सूत्रों ने बताया है कि यह अभ्यास एक काल्पनिक युद्ध की कार्रवाई की तरह किया जाएगा और इस पूरे अभ्यास को इंटीग्रेटेड एयर कमांडर एंड कंट्रोल सिस्टम (IACCS) से नियंत्रित किया जाएगा। यह भारतीय वायुसेना द्वारा विकसित किया गया एक नेटवर्क है जिससे हर एयरक्राफ्ट, रडार और ड्रोन को नियंत्रित किया जाता है।
भारतीय वायुसेना के परिवहन एयरक्राफ्ट रात के अंधेरे में शत्रु के क्षेत्र में गरुड़ कमांडो उतारकर सैनिक ठिकानों को नष्ट करने का प्रदर्शन भी करेंगे।
पिछले वर्ष मई में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष के बाद यह भारतीय वायुसेना का पहला बड़ा अभ्यास है। ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय वायुसेना ने जानकारी के अनुसार सुखोई-30 में लगाई गई ब्रह्मोस मिसाइलों से पाकिस्तान में आतंक के अड्डों के साथ-साथ पाकिस्तानी सेना और वायुसेना के कई ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाया था। साथ ही पाकिस्तान के ड्रोन और मिसाइल हमलों को IACCS और आकाशतीर नेटवर्क की सहायता से सफलता से रोका था।
वायुशक्ति-2026 में भारतीय वायुसेना में शामिल नए हथियारों जैसे लंबी दूरी के ड्रोन और लाइटरिंग म्यूनिशन को युद्ध जैसी स्थिति में परखा जाएगा। इस बड़े सैनिक अभ्यास को देखने के लिए मित्र देशों के राजनयिक और सैन्य प्रतिनिधि उपस्थित होंगे।