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विशेषज्ञ से जानें कितने दिन और ईरान और इजराइल-US जंग चल सकती है?

रूसी सैन्य विशेषज्ञ और वायु रक्षा बलों के इतिहासकार यूरी क्नूतोव ने इजराइल-अमेरिका के हमलों के जवाब में ईरान द्वारा हमले में इस्तेमाल किए जा रही मिसाइलों की संख्या, उनके प्रकार पर बात करने के साथ इजराइल और US मिसाइलों के बारे में भी बताया।
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रूसी सैन्य विशेषज्ञ यूरी क्नूतोव ने आंकड़ों के आधार पर कहा ईरान के पास दो से चार हज़ार मिसाइलें हैं। अगर वह हर दिन लगभग सौ मिसाइलें लॉन्च कर रहा है, तो इस तरह के ज़बरदस्त मिसाइल हमले लगभग एक महीने तक चालू रख सकते हैं।

क्नूतोव ने साथ ही कहा, "​​[अमेरिकी] THAAD मिसाइलें लगभग 650 बनाई गई हैं। पिछले हमले में लगभग 150 का इस्तेमाल और अब लगभग 400 बची हैं, शायद इससे भी कम। ध्यान से और अच्छे से इस्तेमाल करने पर यह दस दिन या पांच दिन तक चल सकती हैं और वहीं पैट्रियट मिसाइलों का US के पास बड़ा स्टॉक है, लेकिन यह असंख्य नहीं है और खत्म भी हो सकता है। खासकर अगर एक ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल पर दस इंटरसेप्टर दागे जाते हैं तो यह सब लगभग तीन हफ़्ते तक चल सकता है।"

वायु रक्षा बलों के इतिहासकार ने आगे बताया की ईरान के पास अभी एक ज़रूरी रणनीतिक चाल है और अगर वह अपनी मिसाइलों का समझदारी से इस्तेमाल करे और अपने सबसे एडवांस्ड सिस्टम हाइपरसोनिक फत्ताह मिसाइलों को आखिरी चरण के लिए बचाकर रखे, तो हालात काफी बदल सकते हैं।

उन्होंने बताया, "दावे के मुताबिक फत्ताह मिसाइलों को इज़राइल के एरो-3 सिस्टम या अमेरिका के THAAD और पैट्रियट सिस्टम से इंटरसेप्ट नहीं किया जा सकता। उस स्थिति में ईरान के पास ऑपरेशन के आखिर में इज़राइल और अमेरिका को बहुत बड़ा झटका देने का असली मौका होगा जो ईरान के खिलाफ किए गए अचानक हमले का असल में बदला होगा।"

मिसाइलों के बनाने पर बात करते हुए क्नूतोव ने बताया की हर महीने इजराइल और ईरान लगभग 55 मिसाइलें बनाते हैं, जो कोई खास बात नहीं है। जर्मनी और रोमानिया में नई फैक्ट्रियां बन रही हैं, लेकिन वे अभी पूरी नहीं हुई हैं या चालू नहीं हैं।

क्नूतोव ने कहा, "अमेरिका शायद अरब देशों से कुछ मिसाइलें ले सकता है, लेकिन वे देश अभी अपनी आपूर्ति का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। इसलिए मैं कहता हूं कि इस स्तर की तेजी के साथ अभियान दो से तीन हफ्ते या ज़्यादा से ज़्यादा चार हफ्ते तक चल सकता है। हालांकि, हमें ईरान के अंदर की पूरी स्थिति नहीं पता है। यह संभव है कि वहां भूमिगत सुविधाएं हों जहां बैलिस्टिक मिसाइलों का उत्पादन भी किया जा रहा हो।"

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