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इंडोनेशिया को ब्रह्मोस निर्यात के समझौते पर हस्ताक्षर, फिलीपींस के बाद बनेगा दूसरा विदेशी ग्राहक

भारत और रूस के सहयोग से बनी सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल ब्रह्मोस के इंडोनेशिया को निर्यात की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है। इंडोनेशिया के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता रिकी रिकार्डो ने एक न्यूज़ एजेंसी को जानकारी दी है कि दोनों देशों के बीच इस सौदे को लेकर समझौते पर हस्ताक्षर हो गए हैं। 
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इंडोनेशिया को ब्रह्मोस के निर्यात की चर्चाएं पिछले वर्ष नवंबर से तेज़ हो गई थीं जब इंडोनेशिया के नई दिल्ली में भारतीय रक्षामंत्री के साथ भेंट की थी। इस भेंट में भारतीय रक्षामंत्री ने इंडोनेशिया के रक्षामंत्री को ब्रह्मोस की एक प्रतिकृति भी दी थी। इंडोनेशियाई प्रतिनिधिमंडल को ब्रह्मोस एयरोस्पेस के अधिकारियों ने इस मिसाइल के बारे में विस्तृत जानकारी दी थी।
भारत ने 2022 में ब्रह्मोस के पहले निर्यात के लिए फिलीपींस से समझौता किया था जिनकी आपूर्ति की जा चुकी है। फिलीपींस की ही तरह इंडोनेशिया भी ब्रह्मोस को अपनी समुद्री सुरक्षा के लिए प्रयोग करने की योजना बना रहा है।
इंडोनेशिया के अतिरिक्त भारत के सुदूर पूर्व के कई देश जैसे वियतनाम, मलेशिया ब्रह्मोस में रुचि दिखा रहे हैं। वियतनाम के साथ ब्रह्मोस को निर्यात करने की चर्चा अपने अंतिम दौर में है।
ब्रह्मोस का विकास और उत्पादन भारत और रूस सााथ मिलकर करते हैं। ब्रह्मोस का प्रयोग भारतीय नौसेना, सेना और वायुसेना तीनों ही करती हैं। इस मिसाइल का प्रयोग शत्रु के युद्धपोतों के विरुद्ध या उसके ज़मीनी सैनिक ठिकानों के विरुद्ध किया जा सकता है।
पिछले वर्ष मई में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष में सुखोई-30 फ़ाइटर जेट से दागी गई ब्रह्मोस ने अपने ठिकानों पर अचूक प्रहार कर उन्हें नष्ट किया था। प्रारंभिक तौर पर 295 किमी की रेंज वाली ब्रह्मोस की रेंज को 450 किमी और 800 किमी किया जा चुका है।
अब ब्रह्मोस की अगली पीढ़ी यानि ब्रह्मोस-एनजी के विकास का कार्य चल रहा है। ब्रह्मोस की यह नई पीढ़ी भार में 1.5 टन तक की हो सकती है और इसकी रेंज 1200 किमी तक हो सकती है। इतने कम भार के कारण यह ब्रह्मोस भारतीय वायुसेना के मिग-29 के अतिरिक्त स्वदेशी जेट तेजस में भी लगाई जा सकेगी।
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