प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जैसे कोरोना संकट का देश ने धैर्य,संयम और शांति से सामना किया था वैसे ही पश्चिम एशिया संघर्ष से पैदा होने वाले आर्थिक और सुरक्षा की चुनौतियों का सामना करने की तैयारी करनी होगी।
प्रधानमंत्री ने विश्वास दिलाया कि देश की आर्थिक स्थिति स्थिर है और इस संकट के प्रभाव को कम से कम करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि तेल, गैस और उर्वरकों के आयात को सुनिश्चित किया जा रहा है जिसमें घरेलू प्रयोग की गैस को प्राथमिकता दी जा रही है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सरकार खाद्यान्नों के पर्याप्त भंडार सुनिश्चित कर रही है और होर्मुज़ स्ट्रेट में यातायात रोके जाने को सहन नहीं किया जा सकता। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि भारत किसी भी विवाद को कूटनीति से सुलझाने के पक्ष में है और वह पश्चिम एशिया के नेताओं से चर्चा कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने इस संबोधन से एक दिन पहले यानि रविवार को सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी यानि सीसीएस की महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में सीसीएस के सदस्यों विदेश, रक्षा, गृह और वित्त मंत्रियों के अतिरिक्त नागरिक उड्डयन, कृषि, ऊर्जा, उद्योग, शिपिंग, रेलवे, स्वास्थ्य जैसे मंत्री भी शामिल हुए जो सीसीएस के सदस्य नहीं है।
साफ़ है कि भारत सरकार समझ रही है कि फरवरी में प्रारंभ हुए पश्चिम एशिया संकट के लंबा चलने की आशंका है जिसका भारत पर बड़ा असर पड़ सकता है।
ईरान-अमेरिका-इज़रायल संघर्ष का भारत पर गहरा असर पड़ रहा है। भारत अपनी ऊर्जा की आवश्यकताओं का बड़ा भाग आयात से पूरा करता है।
भारत यह आयात ईरान और खाड़ी के दूसरे देशों से करता है। हालांकि अभी भारत आने वाले तेल और गैस के टैंकर होर्मुज़ से निकल रहे हैं लेकिन अगर यह संघर्ष लंबा चला तो संकट गहरा हो जाएगा। भारत सरकार इस संकट से निबटने की तैयारी कर रही है और उसने देश को मानसिक रूप से तैयार रहने का संकेत भी दे दिया।